इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति उठाते हैं अधिक आत्महत्या के कदम, रिसर्च में हुआ खुलासा

हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि सिजोफ्रेनिया से पीड़ित मरीजों में आत्महत्या (Suicide risk in schizophrenia) जैसे स्टेप्स उठाने के चांसेज दोगुना अधिक होते हैं।

WrittenBy

Written By: Kishori Mishra | Updated : June 23, 2020 10:02 PM IST

Suicide Risk in Schizophrenia : सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जो लोगों में काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। हाल ही में रिसर्च हुआ है कि सिजोफ्रेनिया से पीड़ित मरीजों में आत्महत्या (Suicide risk in schizophrenia) जैसे स्टेप्स उठाने के चांजेस दोगुना अधिक होते हैं। दरअसल, सिजोफ्रेनिया से पीड़ित मरीजों में आत्महत्या के कोशिशों की भावना अधिक तेज होती है। इनके अंदर आत्महत्या की (Suicide Risk in Schizophrenia) भावना को रोकना काफी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि सिजोफ्रेनिया से ग्रसित मरीज कभी-कभी आत्मघाती विचारों पर आवेग और चेतावनी के बिना कार्य कर सकते हैं। इस वजह से सिजोफ्रेनिया से पीड़ित मरीजों को स्वास्थ्य देखभाल की बेहद जरूरत (Suicide Risk in Schizophrenia) होती है। इसके साथ-साथ ऐसे मरीजों के परिवार और दोस्तों को अधिक जागरूक और रहना चाहिए।

रिसर्च में हुआ खुलासा

सिजोफ्रेनिया एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें रोगी के विभिन्न लक्षण सामने आते हैं, जो मरीजों में अलग-अलग रूप से व्यक्त होता है। सिजोफ्रेनिया रिसर्च जर्नल (Schizophrenia Research journal) में प्रकाशित एक नए अध्ययन में इसके बारे में कहा गया है कि सिजोफ्रेनिया से पीड़ित मरीजों में आत्महत्या की दर अधिक होती है। यह अध्ययन इस विषय का सबसे बड़ा अध्ययन माना जाता है। इसमें करीब 20 सालों तक 75,000 मरीजों के आंकड़ों की जांच की गई है।  इस अध्ययन में कहा गया है कि सिजोफ्रेनिया स्पेक्ट्रम विकारों वाले लोगों की सुसाइड दर नॉर्मल आबादी से 170 गुना अधिक होती है।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में सीएएमएच इंस्टीट्यूट फॉर मेंटल हेल्थ पॉलिसी रिसर्च के प्रमुख लेखक डॉ. जुवेरिया जहीर ने कहा, "यह अध्ययन हमें यह सिखाता है कि हालांकि एसएसडी वाले लोग आत्महत्या के लिए अधिक जोखिम में हैं, पर हम उन्हें नीति और उपचार में परिवर्तन करके बचा सकते हैं।”  इस रिसर्च में कहा गया है कि अतीत में, डॉक्टर्स ने मनोविकृति के इलाज पर ध्यान केंद्रित किया है, जो पहली पहली बार दिखाई देता है। इस अध्ययन से पता चलता है कि इस बीमारी के ट्रीटमेंट में सुसाइड की रोकथाम सुरक्षा योजना शुरुआत से ही शामिल है।

सिजोफ्रेनिया मरीजों में सुसाइड के लिए जोखिम कारक (Risk Factors for Suicide in Schizophrenia)

सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोग, पुरुष, युवा, श्वेत और कभी ना शादी नहीं वाले आत्महत्या जैसे कदम अधिक उठाते हैं। वहीं, इन लोगों में आत्महत्या करने का खतरा भी अधिक होता है।

  • एक उच्च बुद्धि वाले व्यक्ति में
  • 30 वर्ष से कम आयु के पुरुष में
  • किशोर और युवा वयस्कों में

सिजोफ्रेनिया के लक्षण

  • खोया रहना, लक्ष्यहीनता और सामाजिक कटाव महसूस करना।
  • बिना वजह मुस्कुराते हुए रखना।
  • अप्रासंगिक या असंगत बातें करना।
  • भ्रम और मतिभ्रम और असामान्य शारीरिक संवेदनाओं के रूप में सोचने में गड़बड़ी।
  • आवाजें सुन सनाई देना अथवा चित्र दिखाई देना।

आगे इस कदम के बारे में डॉ. जहीर ने कहा,  “अब जब हम जानते हैं कि क्या हो रहा है, तो हमें बेहतर समझने की आवश्यकता है कि क्यों सिजोफ्रेनिया वाला व्यक्ति अपने आप को खत्म करने की कोशिश करता है। रिसर्च में ये भी कहा गया है कि व्यक्तियों में इसके अन्य कारण भी देखे गए हैं, पर हमें आत्महत्या की कोशिश करने वाले लोगों पर अधिक शोध करना होगा।"

चलते-फिरते चीजें चुराने की आदत को ना करें नजरअंदाज, हो सकती है ये गंभीर बीमारी

हल्दी ही नहीं इसका तेल भी है सेहत के लिए रामबाण, डैंड्रफ से लेकर जोड़ों के दर्द को करता है गायब

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source