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भारत में हर साल बढ़ रहे आत्महत्या के मामले, जानिए आत्महत्या करने के प्रमुख कारण और इसे रोकने के उपाय

भारत समेत पूरी दुनिया में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं एनसीआरबी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले साल डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की है। 

भारत में हर साल बढ़ रहे आत्महत्या के मामले, जानिए आत्महत्या करने के प्रमुख कारण और इसे रोकने के उपाय

Written by Atul Modi |Published : August 31, 2022 4:22 PM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल दुनिया भर में 700000 लोग सुसाइड (आत्महत्या) करते हैं। आत्महत्या तब मानी जाती है, जब कोई व्यक्ति अपना जीवन समाप्त करने के उद्देश्य खुद को नुकसान पहुंचाता है और परिणाम स्वरूप उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। जबकि 'आत्महत्या का प्रयास' ऐसा कृत्य है, जिसमें व्यक्ति खुद का जीवन समाप्त करने के उद्देश्य कोई गलत कदम उठाता है मगर सहयोग से उसकी मृत्यु नहीं होती है।

अगर भारत में आत्महत्या के आंकड़ों की बात करें तो वह काफी डरावने हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में कुल 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की। एनसीआरबी ने आत्महत्या को अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर यह दिखाने की कोशिश की है कि देश में किस वर्ग के लोग ज्यादा आत्महत्या कर रहे हैं। इनमें दिहाड़ी मजदूर, घरेलू महिलाएं, बेरोजगार, छात्र और किसान समेत अलग-अलग वर्ग के लोगों ने किसी न किसी कारण से आत्महत्या की।

आत्महत्या के आंकड़े साल दर साल बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में आत्महत्या के कारणों के समझना बहुत जरूरी है। साथ ही हमें यह भी देखना होगा कि आत्महत्या के आंकड़ों को कैसे कम किया जा सकता है?

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आत्महत्या करने के कुछ प्रमुख कारण?

हालांकि आत्महत्या का कारण अज्ञात होता है लेकिन कुछ सामान्य जोखिम कारक है जो आत्महत्या को बढ़ावा देते हैं।

  • कुछ मानसिक रोग जैसे- अवसाद बाइपोलर डिसऑर्डर सिजोफ्रेनिया आदि मूड डिसऑर्डर शामिल है।
  • मादक द्रव्यों का अत्यधिक सेवन
  • आत्महत्या का पारिवारिक इतिहास
  • रिश्तों में कड़वाहट
  • नौकरी का छूटना
  • आत्मसम्मान को ठेस पहुंचना
  • असहनीय भावनात्मक या शारीरिक पीड़ा

आत्महत्या को कैसे रोकें?

अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति या आप स्वयं बहुत तनाव में है और आत्महत्या वाले विचार आ रहे हैं तो सबसे पहले अपने विचारों को डायवर्ट करने की कोशिश करें। मन में उठने वाले बुरे विचारों को अपनी फैमिली या किसी खास दोस्त से शेयर करें, इससे आपका मन हल्का हो जाएगा। अगर आपकी फैमिली में अगर आपकी फैमिली में कोई बहुत अकेला रह रहा है, किसी से बात नहीं करता है, तो उसके पास बैठे हैं और उसके दिल का हाल जानने की कोशिश करें। अगर कुछ ना कर पाएं तो उसे किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट के पास ले जाएं।

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आत्महत्या के विचारों को रोकने के लिए आप आध्यात्म का भी सहारा ले सकते हैं इसके अलावा उन कामों में मन लगा सकते हैं जिसमें आपको सबसे ज्यादा खुशी मिलती हो। अपनी ताकत को पहचानें और सकारात्मक विचारों के साथ जीवन में आगे बढ़ें।

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