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कोविड ने शरीर के इस छोटे से अंदरुनी अंग को भी पहुंचाया बहुत बड़ा नुकसान! जानें कौन सा अंग है ये

मौजूदा अध्ययन में संक्रमित मरीजों के पैंक्रियाटिक सेल्स और डायबिटीज की संभावना पर कोविड इंफेक्शन के प्रभाव के परिणामों का विश्लेषण किया गया था।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : February 24, 2022 3:12 PM IST

जर्नल सेल रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में इस बात का पता चला है कि कोरोनावायरस इंसानों के पैंक्रियाज पर गंभीर प्रभाव डालने का काम करता है। बहुत से अध्ययन में डायबिटीज औक कोरोनावायरस के बीच संबंधों के बारे में बताया जा चुका है। हालांकि कई अन्य रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती हैं कि डायबिटीज और हाइपरगिल्सिमिया कोविड-19 इंफेक्शन की संभावना को बढ़ा देती है। इसी के साथ इंसानों के पैंक्रियाज पर वायरस के प्रभाव को समझने के लिए बारीकी से अध्ययन किया जाना चाहिए।

क्या है ये स्टडी

मौजूदा अध्ययन में संक्रमित मरीजों के पैंक्रियाटिक सेल्स और डायबिटीज की संभावना पर कोविड इंफेक्शन के प्रभाव के परिणामों का विश्लेषण किया गया था। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने उन लोगों के पैक्रियाज से सैंपल लिए, जिन्हें डायबिटीज नहीं थी। इन सैंपल को प्रोडो आइसलेट मीडिया में रखा गया था, जिसके बाद इनमें डी ग्लूकोज, 1 % पेनिसिलिन स्ट्रीप्टोमाइसिन और 10% फेटल बोवाइन सीरम मिलाकर ट्रांसफर किया गया। इसके बाद इन सैंपल को वीरो ई6 सेल लाइन की ओर भेजा गया।

आइसलेट्स पर ग्लूकोज का प्रभाव, एंगोटेंसिन के एंजाइम में बदलने और कोविड-19 इंफेक्शन के संबंध में जांचे गए। जो वीरो ई6 सेल्स कोविड से संक्रमित हुए उनके वायरल टिटर्स की जांच प्लाक के माध्यम से की गई थी।

क्या निकले निष्कर्ष

जब पैंक्रियाटिक आइसलेट्स को कोविड स्पाइक प्रोटीन के साथ मिलाया गया तो बीटा सेल्स के नष्ट हो जाने का खुलासा हुआ। करीबन 2.5 फीसदी आइसलेट्स सेल्स कोविड से संक्रमित पाए गए। वहीं इस अध्ययन में इंसुलिन स्त्रावित बीटा सेल्स को निशाना बनाया गया था, उन सेल्स की तुलना में ग्लूकोजोन से स्त्रावि हुए अल्फा सेल्स थे। वहीं अल्फा और बीटा सेल्स में भी सामान्य स्तर का इंफेक्शन देखा गया था।

डायबिटीज वालों को खतरा अधिक

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि कोविड भले ही उतना प्रभाव नहीं लेकिन पैंक्रियाटिक कोशिकाओं को संक्रमित बना सकता है और महत्वहीन इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स पैदा करता है। इसका न दिखाई देने वाले प्रभाव ने शोधकर्ताओं को कोविड के लिए डायबिटीज की क्षमता को नकारने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, COVID-19 संक्रमणके परिणामस्वरूप माइक्रोवैस्कुलर थ्रॉम्बोसिस हो सकता है जो उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों में डायबिटीज का कारण बन सकता है।