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Written By: Jitendra Gupta | Updated : September 15, 2021 10:59 AM IST
इस 1 चीज से कंट्रोल हो सकती है टाइप-2 डायबिटीज! स्टडी में खुलासा कुछ महीनों में दिखने लगेगा असर
टाइप-2 डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है, जो मौजूदा वक्त में लोगों की सबसे बड़ी और घातक परेशानी बन चुकी है। हालांकि इस समस्या को रोक पाना मुश्किल है लेकिन कुछ बदलावों के सहारे इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है। हाल ही में एक अध्ययन में ये सामने आया है कि टाइप 2 डायबिटीज रोगी सिर्फ अपनी डाइट के माध्यम से ही इसे कंट्रोल कर सकते हैं।
नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी और इंग्लैंड के टेसाइड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक शोध में स्थानीय फार्मासिस्टों द्वारा तैयार की गई एक विशेष डाइट योजना के बारे में बताया गया, जिसमें 12-सप्ताह के अंदर डायबिटीज कंट्रोल करने का दावा किया गया।
अध्ययन के मुताबिक, इस अध्ययन में सभी टाइप 2 डायबिटीजरोगी शामिल थे, जिन्हें कम कैलोरी, कम कार्बोहाइड्रेट और हाई प्रोटीन फूड्स से बना एक विशेष डाइट प्लान बताया गया और नियमित रूप से दवाओं के सेवन पर जोर दिया गया।
अध्ययन के सह-लेखक डॉ जोनाथन लिटिल का कहना है कि टाइप 2 डायबिटीज का इलाज किया जा सकता है, और कभी-कभी डाइट में बदलाव से ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। डॉ जोनाथन ने बताया हालांकि, हमें रोगियों द्वारा ली जाने वाली दवा में परिवर्तन पर नजर रखते हुए इन बदलावों को लागू करने में मदद करने के लिए एक रणनीति की आवश्यकता थी।
डॉ जोनाथन ने कहा, "जब टाइप 2 डाय़बिटीज रोगी ऐसी डाइट फॉलो करते हैं, जिसमें बहुत कम कार्बोहाइड्रेट या कम कैलोरी होती है तो उन्हें ग्लूकोज कम करने वाली दवाओं को उपयोग कम करने या फिर समाप्त करने की आवश्यकता होती है।
अध्ययन के मुताबिक, अध्ययन में शामिल आधे रोगियों ने डाइट में कम कैलोरी, कम कार्बोहाइड्रेट, हाई प्रोटीन लिया साथ ही उनके ब्लड शुगर लेवल भी नियमित रूप से जांच की गई। 12 सप्ताह के बाद, टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित करीब एक तिहाई से अधिक लोगों ने अपनी दावइयां छोड़ दी थी जबकि कंट्रोल ग्रुप में ऐसा करने वाला कोई भी नहीं था। इसके साथ ही डॉ लिटिल का यह भी कहना है कि पहले समूह के रोगियों के ग्लूकोज कंट्रोल, शरीर के औसत वजन, सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और समग्र स्वास्थ्य में काफी सुधार देखा गया।
टेसाइड यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ हेल्थ एंड लाइफ साइंसेज के प्रोफेसर और अध्ययन के सह- लेखक डॉ एलन बैटरहम ने बताया कि इसके पीछे की मुख्य वजह उनको मिलने वाला पोषण था, जिसकी देखरेख निर्धारित दवाओं के साथ की गई थी।
डॉ बैटरहैम ने कहा, "ये बदलाव कई लोगों के लिए ग्लूकोज कम करने वाली दवाओं की आवश्यकता को कम करने में प्रभावी साबित हुए हैं।