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बायपोलर डिसऑर्डर और डिप्रेशन में यूज होने वाली ये चीज डिमेंशिया के खतरे को कम करने में फायदेमंद, जानें क्या है ये चीज

शोधकर्ताओं का कहना है कि लिथियम, डिमेंशिया के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है, जो कि करीब हर साल 1 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। जानें किस काम आता है लिथियम।

बायपोलर डिसऑर्डर और डिप्रेशन में यूज होने वाली ये चीज डिमेंशिया के खतरे को कम करने में फायदेमंद, जानें क्या है ये चीज
बायपोलर डिसऑर्डर और डिप्रेशन में यूज होने वाली ये चीज डिमेंशिया के खतरे को कम करने में फायदेमंद, जानें क्या है ये चीज

Written by Jitendra Gupta |Published : March 19, 2022 10:52 AM IST

आप ये बात अच्छे से जानते होंगे कि डिमेंशिया उम्र से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति अपनी याददाश्त धीरे-धीरे खोते चले जाता है। लेकिन अब शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तरकीब ढूंढ निकाली है, जिसकी मदद से डिमेंशिया का खतरा कम किया जा सकता है। जी हां, शोधकर्ताओं का कहना है कि लिथियम, डिमेंशिया के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है, जो कि करीब हर साल 1 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं कैसे लिथियम इसमें आपकी मदद कर सकता है।

दुनियाभर में 5 करोड़ से ज्यादा लोग शिकार

बता दें कि दुनियाभर में साढ़े 5 करोड़ से ज्यादा लोग डिमेंशिया का शिकारहैं। डिमेंशिया सभी बीमारियों से मरने वाले लोगों में सातवीं सबसे बड़ी बीमारी है। इतना ही नहीं ये दुनियाभर में ये बुजुर्गों के बीच विकलांगता और निर्भरता के सबसे बड़े कारणों में से एक है।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने किया अध्ययन

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन से ये बात सामने आई है कि वे मरीज, जिन्होंने लिथियम का सेवन किया उनमें ऐसा न करने वालों की तुलना में डिमेंशिया का खतरा काफी कम था। हालांकि इस अध्ययन में मरीजों की संख्या काफी कम थी, जिन्होंने लिथियम लिया था।

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टीम ने 50 साल की उम्र से अधिक करीब 30 हजार मरीजों के स्वास्थ्य रिकार्ड का बारीकी से अध्ययन किया।

डिमेंशिया के उपचार में लिथियम प्रभावी

जर्नल PLoS Medicine में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्ष इस बात का समर्थन करते हैं कि लिथियम, डिमेंशिया के रोकथाम उपचार में प्रभावी साबित हो सकता है और इसका बड़े पैमाने पर ट्रायल किया जा सकता है।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

कैंब्रिज डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री के प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. शानकेन चेन का कहना है कि डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो कि हमारे स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र पर एक बड़ा दबाव डाल रही है। उन्होंने कहा कि अगर डिमेंशिया के खतरेको अगर 5 साल तक टाल दिया जाए तो इसके बढ़ने और आर्थिक प्रभाव को कम से कम 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

पहले नहीं था टालने का पता

पिछले कुछ अध्ययन में ये कहा गया था कि लिथियम, उन लोगों के लिए संभावित उपचार के रूप में प्रयोग किया जा सकता है, जो डिमेंशिया का शिकार हो चुके हैं या फिर उनमें याददाश्त संबंधी समस्याएं शुरू हो चुकी हैं लेकिन ये बात अभी तक अस्पष्ट थी कि क्या लिथियम डिमेंशिया के विकास और उसे रोकने में प्रभावी है। हालांकि ये सभी अध्ययन आकार में सीमित थे।

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क्या है लिथियम

चेन का कहना है कि लिथियम एक मूड स्टैबिलाइजर है, जिसका प्रयोग आमतौर पर बायपोलर डिसऑर्डर और डिप्रेशन जैसी स्थिति के लिए किया जाता है। बायपोलर डिसऑर्डर और डिप्रेशन को डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाने वाले कारकों के रूप में देखा जाता है, इसलिए हमारे विश्लेषण में ये एक बहुत जरूरी पड़ाव है।

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