
Also Read
अल्जाइमर-पार्किंसंस और लॉन्ग कोविड की शुरुआत एक जैसी! दिमाग में बनने लगते हैं इस तरह के गुच्छे, पढ़ें रिपोर्ट
आपने पहले भी कई बार लॉन्ग कोविड के बारे में पढ़ा होगा, जिसमें आपको कोविड से ठीक होने के कुछ वक्त तक अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लॉन्ग कोविड की ढेर सारी जटिलताएं हैं, जिसमें से एक है ब्रेन फॉग। जर्नल नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लॉन्ग कोविड के कारण होने वाले ब्रेन फॉग के संभावित कारण का पता लगाया है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि लॉन्ग कोविड में न्यूरोलॉजिक्ल लक्षणों में से कुछ का कारण दिमाग में बनने वाले प्रोटीन के गुच्छे होते हैं। ये प्रोटीन के गुच्छे अल्जाइमर और डिमेंशिया का कारण बनने वाली परेशानी के ठीक समान होते हैं।
अध्ययन में कोविड के प्रभाव और अल्जाइमर व पार्किंसन जैसी बीमारी के शुरुआती दौर के बीच भी बहुत सी समानताएं पाई गई हैं। हालांकि शोधकर्ताओं ने ये चेतावनी भी दी है कि इन बदलावों से होने वाली जटिलताएं अभी भी अस्पष्ट हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ये बदलाव इस ओर इशारा नहीं करता है कि लोगों को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचता है या फिर आपकी याददाश्त, सोचने की शक्ति और दूसरे काम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अगर भविष्य में होने वाले शोध में इस बात की पुष्टि हो जाती है कि अल्जाइमर के कारण जैसे एमीलॉयड क्लंप या फिर असामान्य प्रोटीन क्लंप लॉन्ग कोविड में योगदान देते हैं तो अल्जाइमर और पार्किंसन के उपचार में प्रयोग होने वाली दवा इन न्यूरोलॉजिक्ल लक्षणों को कम करने में काम आ सकती है।
ऑस्ट्रेलिया की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निक रेनॉल्ड का कहना है कि वे कोविड रोगी, जो लॉन्ग कोविड का अनुभव कर चुके हैं उनमें ब्रेन फॉग की स्थिति के उपचार में मौजूदा दवाएं काम कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि ये संभव हो सकता है कि ब्रेन फॉग के उपचार में प्रयोग होने वाली दवाएं कोविड से संक्रमित उन लोगों में, जो लॉन्ग कोविड का अनुभव कर रहे हैं उनमें से कुछ को प्रभावित कर सकती है।
कुछ मामलों में कोविड रोगी टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी कुछ लक्षणों से जूझते रहते हैं। इसे ही लॉन्ग कोविड या फिर पोस्ट कोविड स्थिति के रूप में जाना जाता है। जो भी व्यक्ति कोविड से संक्रमित हुआ है फिर चाहे उसमें लक्षण हल्के हो या फि न हो उसे भी कोविड से ठीक होने के बाद ये प्रभाव झेलना पड़ता है।