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Written By: Jitendra Gupta | Updated : July 29, 2021 5:05 PM IST
कोरोना के गंभीर मरीजों में रक्त के थक्के बनने से बिगड़ रहा एंटीबॉडी रिस्पॉन्स, जानें क्या कहती है स्टडी में छपी ये बातें
हम सभी जानते हैं कि कोरोना एक बेहद ही संक्रामक और जानलेवा बीमारी है, जिसके लेकर रोजाना नए-नए अध्ययन सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक अध्ययन में ये सामने आया है कि कोरोना के बहुत गंभीर मामलों में रक्त के थक्के यानी की ब्लड क्लॉट बन रहे हैं और फेफड़ों में सूजन हो रही है, जिसके पीछे एंटीबॉडी एक बड़ा कारण है, जो कि फेफड़ों में अनावश्यक प्लेटलेट गतिविधि को सक्रिय करने और बीमारी से लड़ने के लिए भेजी जाती हैं।
ब्लड जर्नल में प्रकाशित एक नए शोधपत्र से पता चलता है कि कैसे कोविड -19 से बचाव के लिए हमारे शरीर में उत्पादित एंटीबॉडीज, प्लेटलेट्स के बढ़े हुए कार्य को बढ़ाने का काम कर रही है, जिससे गंभीर रूप से बीमार लोगों में ब्लड क्लॉट बनते हैं। दरअसल हो कुछ ऐसा रहा है कि रक्त में पाई जाने वाली छोटी कोशिकाएं, जिन्हें प्लेटलेट्स कहते हैं, रक्तस्राव को रोकने के लिए थक्के का निर्माण करती हैं लेकिन इस स्थिति में प्लेटलेट्स ठीक से काम नहीं करती हैं और इससे स्ट्रोक और दिल के दौरे जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कोविड -19 संक्रमण से पीड़ित लोगों के शरीर में कोरोनवायरस के स्पाइक प्रोटीन से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज डाली और अध्ययन के लिए एक प्रयोगशाला में उनका क्लोन बनाया।
शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि इन एंटीबॉडी की सतह पर पाए जाने वाली छोटी शुगर हेल्दी व्यक्तियों में मौजूद एंटीबॉडी से अलग थी। इसके बाद जब उन क्लोन एंटीबॉडी को हेल्दी लोगों से ली गई रक्त कोशिकाओं में मिलाया गया तो पाया कि उनकी प्लेटलेट गतिविधि बहुत तेजी से बढ़ गईं।
शोधकर्ताओं की टीम ने यह भी पाया कि रक्त के उपचार में प्रयोग की जाने वाली विभिन्न दवाओं में मौजूद एक्टिव इंग्रीडियंट्स प्लेटलेट्स को रोकने या उसे कम करने में प्रभावी हैं। ये दवाएं प्लेटलेट फ़ंक्शन या इम्यून रिस्पॉन्स को बाधित करने के लिए जानी जाती हैं।
अध्ययन के निष्कर्ष ये भी बताते हैं कि ऐसा उन दवाओं से हो सकता है, जो वर्तमान में आपके इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्याओं के इलाज में उपयोग की जाती हैं ताकि कोशिकाओं को जरूरत से ज्यादा प्लेटलेट रिसपॉन्स पैदा करने से रोका जा सके।
इंपीरियल कॉलेज लंदन और इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट में हेमेटोलॉजिस्ट सलाहकार के साथ-साथ अध्ययन की सेह-लेखक निकोला कूपर का कहना है कि कोविड -19 की शुरुआत में यह स्पष्ट था कि संक्रमण इम्यूनिटी पर भारी पड़ रहा है और रक्त के थक्के बन रहे हैं और यह कि अधिक गंभीर मामलों और मौतों में से कई इससे संबंधित थे।