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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 12, 2021 5:21 PM IST
अस्थमा को कंट्रोल कर कम किया जा सकता है कोरोना का खतरा, स्टडी में हुआ चौंका देने वाला खुलासा
भले ही कोरोनावायरस की दूसरी लहर थमती नजर आ रही हो लेकिन कुछ लोगों के लिए कोरोना का खतरा अभी तक टला नहीं है। हालांकि कुछ लोग अपने रोजाना के जीवन में कुछ छोटे-बड़े काम कर कोरोना के खतरे को जरूर कम कर सकते हैं। जी हां, हाल ही में हुए एक बड़े अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन अस्थमा रोगियों को अपने अस्थमा पर कंट्रोल है उन्हें दूसरे मरीजों की तुलना में कोरोना के गंभीर रूप से शिकार होने का खतरा बहुत कम है।
द जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन के निष्कर्ष ये बताते हैं कि वे अस्थमा रोगी, जिन्हें विशेष रूप से क्लीनिकली केयर की जरूरत होती है उन्हें कोविड -19 के दौरान अपनी अस्थमा की दवाएं बिना किसी परहेज के लेना जारी रखनी चाहिए।
दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के केक स्कूल ऑफ मेडिसिन में जनसंख्या और सार्वजनिक स्वास्थ्य विज्ञान के सहायक प्रोफेसर झांगहुआ चेन ने कहा है कि अस्थमा से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को अपने डॉक्टर से नियमित रूप से मिलते-जुलते रहना चाहिए और अपने स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेते रहनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें अपने इलाज के दौरान समय पर अपनी दवाओं का ख्याल रखना चाहिए, जिससे अस्थमा कंट्रोल करना आसान हो जाता है और कोविड -19 के गंभीर परिणामों की संभावना कम हो जाती है।
शोधकर्ताओं ने 1 मार्च से 31 अगस्त, 2020 तक कैसर परमानेंट सदर्न कैलिफोर्निया से इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड का उपयोग कर कोविड के शिकार 61,338 रोगियों से प्राप्त को जमा किया। मेडिकल कोड का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया गया था कि क्या इन रोगियों में कोविड -19 का पता लगने से पहले अस्थमा या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज थी।
इसके बाद शोधकर्ताओं ने डेटा को और खंगाला और आंकड़ों दो भागों में विभाजित कर दिया। एक जिसमें पिछले 12 महीनों के भीतर अस्थमा के लिए डॉक्टर के पास जाने वाले रोगी शामिल थे जबकि दूसरा समूह, जो कभी अस्थमा की जांच के लिए डॉक्टर के पास गया ही नहीं था।
जिन लोगों में पहले से ही अस्थमा की शिकायत थी उनके दूसरे अस्थमा समूह के मरीजों की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने के साथ-साथ इंटेंस रेस्पिरेटरी सपोर्ट और आईसीयू में जाने की संभावना काफी ज्यादा थी।
शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से एक्टिव अस्थमा ग्रुप में 60 दिनों के भीतर मृत्यु दर की संभावना को बढ़ते हुए पाया। कैसर परमानेंट सदर्न कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ रिसर्च के एनी एच जियांग ने बताया कि यह अध्ययन कोविड -19 परिणामों पर अस्थमा के प्रभाव की जांच की सभी संभावनाओं का पार करता है। इसके अलावा ये अध्ययन इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि अस्थमा रोगियों के लिए कोविड -19 के परिणाम अस्थमा नियंत्रण के स्तर के आधार पर कैसे बदल सकते हैं।
जियांग ने ये भी कहा कि हमने अध्ययन में यह भी पाया कि जिन रोगों में अस्थमा की शिकायत पहले से और ज्यादा थी अगर वे अस्थमा की दवाओं का उपयोग कर रहे थे, तो उनमें कोविड -19 के गंभीर परिणामों की संभावना काफी कम हो गई, जो दर्शाता है कि ये दवाएं कितनी महत्वपूर्ण हैं।"