फेफड़ों से जुड़ा संक्रमण नहीं है कोरोनावायरस, स्टडी में दावा आखिर क्या है कोरोना की असली जड़

एक नए अध्ययन में ये दावा किया गया है कि कोविड-19 स्पष्ट रूप से कोई श्वसन रोग यानी सांस से जुड़ी बीमारी नहीं है। जानिए फिर क्या है कोरोनावायरस।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : September 1, 2021 10:12 AM IST

बीते वर्ष से दुनियाभर में फैला कोरोनावायरस और उसके बाद नए-नए वेरिएंट ने अरबों लोगों को अपना शिकार बनाया और लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई। कोरोनावायरस को लेकर रोजाना नए-नए अध्ययन और दावे भी सामने आते रहे हैं, जिन्हें जानकर लोग असमंजस की स्थिति में रहते हैं लेकिन हर अध्ययन और दावे में एक चीज, जो कॉमन थी और जिसने सभी लोगों को भ्रमित करने का काम। जी हां, एक नए अध्ययन में ये दावा किया गया है कि कोविड-19 स्पष्ट रूप से कोई श्वसन रोग यानी सांस से जुड़ी बीमारी नहीं है।

अध्ययन के मुताबिक, वास्तव में कोविड 19 वायरस उन लोगों को अपना शिकार बनाता है, जिन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। हालांकि ऐसे भी बहुत सारे रोगी हैं, जिनमें हल्के से मध्यम श्वसन लक्षण दिखाई दिए और वे बिना किसी पेशेवर देखभाल के ठीक भी हो गए।

क्या कहता है अध्ययन

इस नए अध्ययन में ये दावा किया गया है कि कोविड-19 एक वास्कुलर कंडीशन है न कि सांस से जुड़ा कोई रोग जैसा कि अब तक माना जा रहा है। कैलिफोर्निया -सैन डिएगो विश्वविद्यालय द्वारा किए गए इस अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 से संक्रमित कुछ रोगियों में रक्त के थक्के बनने के साथ-साथ कोविड फीट जैसी अन्य समस्याएं भी पाई गईं।

जर्नल सर्कुलेशन रिसर्च में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, ये वायरस रोगी की धमनियों या फिर सर्कुलेटरी सिस्टम को निशाना बनाता है। ये एस प्रोटीन होता है, जो कि एक घेरा बनाता है और शरीर में मौजूद एसीई2 रिसेप्टर पर हमला करता है और कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाता है। ये सेल ऊर्जा बनाते है और एंडोथेलियम का निर्माण करते हैं, जो रक्त धमनी को कवर करने का काम करता है।

रिसर्च में ये भी दावा किया गया कि एक आभासी वायरस, जिसमें सिर्फ एस प्रोटीन होता है और लैब में पाया गया ये वायरस या इसका कोई भी हिस्सा ये नहीं दर्शाता कि ये प्रोटीन खुद अपने आप को भी बीमार करने में सक्षम है। ऐसा पहले भी देखा गया है कि एस प्रोटीन का वास्तविक तरीका या कार्यप्रणाली अभी तक अज्ञात है। अध्ययन के मुताबिक, ये प्रोटीन सभी यूज होने वाली वैक्सीन से दोबारा बन जाता है।

क्या आया सामने

वास्कुलर समस्याएं रोगी केइम्यून रिस्पॉन्ससे संबंधित हो सकती हैं। फेफड़े के वास्कुलर टिश्यू में सूजन के कारण श्वसन प्रणाली पर प्रभाव पड़ता है और यही यही कारण है कि कुछ लोग कोविड-19 से पीड़ित होने के दौरान स्ट्रोक या शरीर के अन्य अंगों में बीमारियों से पीड़ित होते हैं।

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