भारत में बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा ! ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

11वें ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' के मौके पर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने स्ट्रोक पर 11वें सीएमई (कन्टीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) सेमिनार का आयोजन किया।

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Written By: Anshumala | Published : November 3, 2018 3:15 PM IST

11वें ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' के मौके पर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने स्ट्रोक पर 11वें सीएमई (कन्टीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) सेमिनार का आयोजन किया। इस साल कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया गया, जिसमें यूएसए सहित दुनिया भर से प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पांच देशों से 250 से अधिक प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।

शहरी क्षेत्रों में स्ट्रोक के लगातर बढ़ते मामलों को देखते हुए इस साल का सम्मेलन और भी महत्वपूर्ण है। इस साल सम्मेलन में वैस्कुलर न्यूरोलॉजी की आधुनिक तकनीकों पर रोशनी डाली गई। साथ ही सम्मेलन ने दुनिया भर के डॉक्टर्स को ऐसा मंच उपलब्ध कराया जहां उन्हें अपने विचारों और अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करने का मौका मिला। कुछ डॉक्टर्स ने हाल ही में अपने द्वारा किए गए शोध और विशेष मामलों पर अपने दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।

11वें संस्करण में सम्मेलन को कई सत्रों में बांटा गया था, जिसमें वैस्कुलर न्यूरोलॉजी से जुड़ी मौजूदा अवधारणाओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

सिम्पोजियम के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. पी एन रंजन अग्रणी न्यूरोलॉजिस्ट हैं जो इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स में जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट हैं। स्ट्रोक के बढ़ते मामलों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘शहरीकरण बढ़ने के साथ दिल्ली जैसे शहरों में प्रदूषण भी बढ़ रहा है, जिसके कारण स्ट्रोक के मामलों की संख्या बढ़ रही है। इस समस्या के समाधान के लिए वैस्कुलर न्यूरोलॉजी महत्वपूर्ण है।’’

सम्मेलन के महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘सीएमई जैसे मंच बेहद महत्वपूर्ण हैं। हमें खुशी है कि न्यूरोसाइन्सेज इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित स्ट्रोक सिम्पोजियम अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम बन चुका है। खासतौर पर भारत जैसे देशों में यह बहुत मायने रखता है जहां लागत और गुणवत्ता जैसे मुद्दों के बारे में जानकारी एक बड़ा बदलाव ला सकती है।’’

स्रोत: प्रेस रिलीज

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