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कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा से स्ट्रोक का खतरा भी 33 फीसदी तक कम, स्टडी से जानिए कौन सी दवा से कम हुआ खतरा

अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के मेडिकल जर्नल ऑनलाइन इश्यू ऑफ न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी में इस बात का दावा किया गया है कि ये दवा आपको स्ट्रोक के खतरे से बचाने में कारगर है।

कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा से स्ट्रोक का खतरा भी 33 फीसदी तक कम, स्टडी से जानिए कौन सी दवा से कम हुआ खतरा
कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा से स्ट्रोक का खतरा भी 33 फीसदी तक कम, स्टडी से जानिए कौन सी दवा से कम हुआ खतरा

Written by Jitendra Gupta |Published : December 9, 2022 2:54 PM IST

जब आप किसी दवा का सेवन करते हैं तो वह आपके शरीर पर कई तरह के प्रभाव छोड़ती है, जिसमें कुछ अच्छा तो कुछ बुरा भी हो सकता है। कई स्टडी में दवाओं के प्रभाव और दुष्प्रभाव के बारे में बताया जाता है और हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का जिक्र किया गया है कि कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाली दवा स्टैटिन आपको दिमाग की ऊपरी परत में होने वाले रक्तस्त्राव जैसे स्ट्रोक के प्रकार के खतरे को भी कम करने में मदद कर सकती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के मेडिकल जर्नल ऑनलाइन इश्यू ऑफ न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी में इस बात का दावा किया गया है कि ये दवा आपको स्ट्रोक के खतरे से बचाने में कारगर है।

क्या कहते हैं रिसर्चर

यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न डेनमार्क में पीएचडी और अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के सदस्य और अध्ययन के मुख्य लेखक डेविड गैस्ट का कहना है कि स्टैटिन नाम की ये दवा खून के थक्कों से होने वाले स्ट्रोक के खतरे को कम करने में प्रभावी है हालांकि अभी इस बात को लेकर दोराय है कि क्या स्टैटिन इस प्रकार के स्ट्रोक के खतरेको बढ़ाती है या फिर कम करती है।

उन्होंने कहा कि हमने दिमाग के लोब और गैर लोब हिस्से को देखा ताकि ये पता लगाया जा सके कि स्टैटिन के लिए इनकी स्थिति तो कहीं जोखिम कारक नहीं है। शोधकर्ताओं ने पाया कि वे लोग, जो स्टैटिन का प्रयोग करते हैं उनमें दिमाग के इन दोनों हिस्सों में रक्तस्त्राव से होने वाले स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है। अगर आप बहुत लंबे अरसे से स्टैटिन का यूज कर रहे हैं तो ये खतरा और भी कम पाया गया है।

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कैसे हुई ये स्टडी

शोधकर्ताओं ने इस स्टडी के लिए डेनमार्क के 989 लोगों की पहचान की, जिनकी औसत उम्र 76 साल के आस-पास होगी। ये सभी दिमाग के लोब वाले हिस्से में रक्तस्त्राव का शिकार हुए थे। इन लोगों की तुलना 39500 लोगों से की गई, जिन्हें इस प्रकार का स्ट्रोक नहीं आया था लेकिन इनकी उम्र और दूसरे कारक समान थे।

इसके अलावा शोधकर्ताओं ने 75 साल की औसत उम्र के साथ 1,175 लोगों से प्राप्त डेटा का भी आकलन किया, जो दिमाग के नॉन लॉब वाले हिस्से में इंट्रासेरेबल हेमोरेज का शिकार हुए थे। इन लोगों की तुलना 46755 लोगों के साथ की गई, जो इस प्रकार के स्ट्रोक का शिकार नहीं हुए थे लेकिन इनकी उम्र और दूसरे कारक समान थे।

क्या निकला स्टडी में

अध्ययन में शामिल कुल लोगों में से स्ट्रोक का शिकार होने वाले 6.8 फीसदी लोग, जिन्होंने पांच या उससे ज्यादा वक्त तक स्टैटिन ली थी उनकी तुलना 8.6 फीसदी लोगों के साथ की, जिन्हें स्ट्रोक नहीं हुआ था। जब हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, शराब के सेवन जैसे कारकों को देखा गया तो शोधकर्ताओं ने पाया कि वे लोग, स्टैटिन का यूज कर रहे हैं उन्हें दिमाग के लोब वाले हिस्से में स्ट्रोक का खतरा 17 फीसदी कम है जबकि नॉन लोब वाले हिस्से में ये खतरा 16 फीसदी कम पाया गया।

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लंबे वक्त तक यूज से कम खतरा

स्टडी में पाया गया कि अगर आप लंबे वक्त से स्टैटिन का यूज करते हैं तो ये दिमाग के दोनों हिस्सों में स्ट्रोक के खतरे को कम करने से जुड़ी हुई है। अगर कोई व्यक्ति पांच साल या उससे ज्यादा वक्त से स्टैटिन ले रहा है तो उसके दिमाग के लोब वाले हिस्से में स्ट्रोक का खतरा 33 फीसदी कम पाया गया है और नॉन लोब वाले हिस्से में ये खतरा 38 फीसदी कम पाया गया है।

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