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ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहा तो कम हो सकता है बच्चों में ब्रेन डैमेज का रिस्क, स्टडी का दावा

बचपन में लो ब्लड शुगर की स्थिति या हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) का इलाज कराने से छोटे बच्चों में आगे चलक उनके दिमाग को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद हो सकती है।

Written by Sadhna Tiwari |Updated : April 4, 2022 4:52 PM IST

Controlling Low Blood Sugar Level Can Prevent Brain Damage: कम उम्र में डायबिटीज से पीड़ित बच्चों में लो ब्लड शुगर लेवल को अगर नियंत्रित रखा जा सके तो इससे बच्चों में ब्रेन डैमेज की संभावना (Risk of brain damage) कम की जा सकती है। यह दावा किया गया है एक नयी स्टडी में जिसके परिणाम जेएएमए (JAMA) मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किए गए। इस स्टडी के अनुसार, शोधकर्ताओं को पता चला कि, बचपन में लो ब्लड शुगर की स्थिति या हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) का इलाज कराने से छोटे बच्चों में आगे चलकर उनके दिमाग को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद हो सकती है। (Controlling Low Blood Sugar Level Can Prevent Brain Damage In Hindi.)

ब्लड शुगर लेवल कम होना दिमाग के लिए नुकसानदायक

इस स्टडी का आयोजन कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू और न्यूजीलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड के वैज्ञानिकों ने मिलकर की।  बता दें कि, यह इस तरह की पहली स्टडी है जिसमें हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति से पीड़ित बच्चों में ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखने के महत्व को दर्शाया है। इस स्टडी के अनुसार, लो ब्लड शुगर लेवल (Low Blood Sugar Level )को अनियंत्रित रखने से बच्चे के दिमाग को दीर्घकालिक क्षति से बचा सकते हैं।

बच्चों का तंत्रिका विकास लो ब्लड शुगर लेवल से हो सकता है प्रभावित

स्टडी के निष्कर्षों के मुताबिक, हर 6 में से एक बच्चे में लो ब्लड शुगर लेवल की स्थिति (chances of Low Blood Sugar Level In Kids) देखी जा सकती है। जैसा कि ग्लूकोज (Glucose) दिमाग और शरीर को शक्ति देने वाले प्रमुख स्रोत है। इसीलिए, जब शरीर में ब्लड ग्लूकोज लेवल कम होता है तो इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य (Mental health) प्रभावित होता है। हाइपोग्लाइसेमिया के रिस्क वाले 480 बच्चों की जांच की गयी।  स्टडी के दौरान पाया गया कि,

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  • लो ब्लड शुगर लेवल की स्थिति से 4.5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में तंत्रिका विकास या न्यूरोडेवलपमेंट (Neurodevelopment) प्रभावित हो सकता है।
  • 9-10 वर्ष के बच्चों के दिमागी विकास पर पड़ने वाले ब्लड शुगर लेवल के दीर्घकालिक प्रभावों की जांच की गयी और शोधकर्ताओं के अनुसार, नियोनटल हाइपोग्लाइसेमिक के साथ जन्म लेने वाले बच्चों में शैक्षिक प्रदर्शन में कोई व्यापक अंतर नहीं देखा गया।

इस बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के प्रोफेसर बेन थाम्पसन  का कहना है कि, हाइपोग्लाइसीमिया के साथ जन्म लेने वाले बच्चों में ब्रेन को दीर्घकालिक डैमेज पहुंचने की आशंका नहीं देखी गयी।

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