रक्षाबंधन के मौके पर एक बहन ने भाई को दिया जीवन का उपहार, अपनी लिवर देकर बचाई भाई की जान

बहन जुबैदा ने अपने भाई बिलाल को दिया नया जीवन, जो लिवर की जानलेवा बीमारी से पीड़ित था।

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Written By: Anshumala | Published : August 14, 2019 2:42 PM IST

भाई और बहन के बीच प्यार का त्योहार रक्षाबंधन भारतीयों में बेहद पवित्र माना जाता है। आमतौर पर इस त्योहार के दिन भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है। हालांकि, यह रक्षाबंधन बिलाल अहमद के लिए खास रहा, जिसे उसकी बहन जुबैदा ने अपना लिवर डोनेट कर नया जीवन दिया है।

लिवर की बीमारी से था पीड़ित बिलाल

श्रीनगर का निवासी 45 वर्षीय बिलाल लिवर की क्रोनिक बीमारी से पीड़ित था। उसके लिवर में बहुत ज्यादा फैट जमा हो गया था, जिसके चलते उसके जीवन की गुणवत्ता बहुत खराब हो चुकी थी। धीरे-धीरे उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई। इन सब के बीच बिलाल एक दुर्घटना का शिकार हो गया, जिसके चलते उसकी बाईं हाथ और दाएं पैर की हड्डी टूट गई। इस दुर्घटना के बाद तो उसका जीवन और मुश्किल हो गया।

लिवर रोग के कारण हाथ-पैर की सर्जरी करना नहीं था संभव  

फ्रैक्चर बहुत जटिल था, इसके लिए हाथ और पैर की सर्जरी करने की जरूरत थी, लेकिन लिवर की बीमारी की वजह से सर्जरी नहीं की जा सकती थी। बिलाल को जाॅन्डिस भी हो गया था, जो अपने चरम स्तर पर पहुंच गया था और उसमें खून का थक्का जमाने की क्षमता भी खत्म हो गई थी। बिलाल बहुत दर्द में था और हर बीतते दिन के साथ उसका जीवन और चुनौतीपूर्ण होता चला जा रहा था। उसका लिवर फंक्शन टेस्ट 20 से भी कम था और उसे बचाने का सिर्फ एक ही तरीका था- लिवर ट्रांसप्लांट, जिसके बाद ही उसके हाथ और पैर की सर्जरी संभव थी। बिलाल के मामले में लिवर का इलाज किए बिना कोई भी अन्य सर्जरी उसके जीवन के लिए खतरनाक हो सकती थी।

डॉक्टर ने दी लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह

उसने नई दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स में डाॅक्टर नीरव गोयल से संपर्क किया, जिन्होंने उसे लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी। स्थित बहुत गंभीर थी, क्योंकि ऐसे मामलों में लिवर मैच करना जरूरी होता है। लिवर मैच के लिए 2 से अधिक डोनर्स की जांच की गई, लेकिन लिवर मैच नहीं हो पाया। तब बिलाल की बहन जुबैदा का लिवर उसके साथ मैच हो गया। वह अपना लिवर डोनेट कर अपने भाई को नया जीवन देना चाहती थी।

डीकंपनसेटेड सिरोसिस का किया गया निदान

डाॅ. नीरव गोयल, सीनियर कन्सलटेन्ट एवं हेड, अपोलो एलटी एंड एचपीबी सर्जरी युनिट, इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स ने कहा, ‘‘जब मरीज हमारे पास आया, तो उसमें डीकंपनसेटेड सिरोसिस का निदान किया गया। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें मरीज की जान तक जा सकती है। इसके अलावा मरीज के शरीर में मल्टीपल फ्रैक्चर भी थे। लिवर की बीमारी अपनी एडवांस अवस्था में पहुंच चुकी थी, जिसके चलते लिवर का इलाज किए बिना फ्रैक्चर की सर्जरी करना नामुमकिन था। ऐसे में उसका तुरंत लिवर ट्रांसप्लांट करने का फैसला लिया। जुबैदा अपने भाई को लिवर डोनेट करने के लिए तैयार थी। जुलाई 2019 को बिलाल की लिवर ट्रांसप्लान्ट सर्जरी की गई। सर्जरी 13 घंटे तक चली। सर्जरी के बाद मरीज और डोनर दोनों ठीक हैं। मरीज को सर्जरी के 21 दिन बाद छुट्टी दे दी गई। अब मरीज और डोनर दोनों के लिवर फंक्शन भी सामान्य हैं।’’

बिलाल ने जताया अपनी बहन का आभार

बिलाल अहमद ने कहा, ‘‘मैं अपनी बहन जुबैदा के प्रति आभारी हूं, जिसने मुझे नया जीवन दिया है। यह रक्षाबंधन मेरे लिए बेहद खास है। मेरी बहन ने मुझे अपना लिवर देकर मेरी जान बचाई है। मैं डाॅ. गोयल और उनकी टीम के प्रति आभारी हूं, जिन्होंने मुझे नया जीवन दिया है। उनकी वजह से ही आज मैं ठीक हूं और स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ाने जा रहा हूं।’’

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