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Written By: Yogita Yadav | Published : August 22, 2018 11:14 AM IST
महाराष्ट्र के मुंबई की रहने वाली खुशबू गनोत्रा चल नहीं सकतीं, लेकिन वह पावर लिफ्टर हैं..टेनिस खेलती हैं..और वीडियो एडिटिंग भी करती हैं। जन्म से ही स्पाइना बाइफिडा रोग से पीड़ित खुशबू व्हीलचेयर पर देशभर के लोगों में जीने का जज्बा भर रही हैं। खुशबू का लक्ष्य अगले पैरालंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।
खुशबू को स्पाइना बिफिडा फाउंडेशन ऑफ इंडिया के हालिया 28वें अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने सम्मानित किया था।
किया चुनौतियों का सामना
खुशबू कहती हैं, "मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लगा। मैं जाह्न्वी (खुशबू की मेंटर) मैम की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाया। मुझे बहुत बाद में पता चला कि दुनियाभर में कई लोग स्पाइना बाइफिडा से पीड़ित हैं। पहले मुझे लगता था कि मैं ही ऐसी हूं। लेकिन ऐसा नहीं है कि बहुत सारे लोग इस तरह के हैं। मैं चाहती हूं कि इस रोग से पीड़ित सभी लोग आत्मनिर्भर बनें।"
खुशबू कहती हैं, "मेरी मां ने मेरी कमजोरी को कभी मेरी बाधा नहीं बनने दिया। वह मेरा पूरा समर्थन करती हैं। उन्होंने सामान्य बच्चों में और मुझमें कोई फर्क नहीं किया और मुझ पर पूरी जिम्मेदारी डाली।"
वह कहती हैं, "चूंकि वह अकेली थीं और काम के सिलसिले में बाहर जाती थीं, इसलिए उन्होंने मुझे पूरी तरह स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि मेरा बच्चा व्हीलचेयर पर है तो वह कैसे रहेगा, क्या करेगा। उन्होंने मुझे एक सामान्य बच्चे की तरह ही पाला। मैं बतौर वीडियो एडिटर के तौर पर काम करती हूं और मैं आर्थिक रूप से सशक्त हूं। लेकिन मेरा लक्ष्य 2020 के पैरालंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।"
जरूरी है एक समान व्यवहार
खुशबू चाहती हैं कि सार्वजनिक स्थानों, जैसे- खेल के मैदान पर नि:शक्त लोगों के साथ सामान्य लोगों जैसा व्यवहार होना चाहिए। वह कहती हैं, "मुझे कई बार लोगों ने टेनिस कोर्ट में प्रवेश करने से मना किया, यह कहकर कि आप व्हीलचेयर पर हैं, आपको प्रवेश नहीं मिल सकता, कोर्ट खराब हो जाएगा। ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए।"
क्या है स्पाइना बाइफिडा
गर्भाधारण के पहले महीने में भ्रूण प्राथमिक ऊतक में बदलना शुरू होता है जिसे न्यूरल ट्यूब कहते हैं। फिर इसमें नर्व, ऊतक और हड्डियां बनने लगती हैं जो नर्वस सिस्टम और स्पाइन में बदलती है। यहीं से स्पाइना बाइफिडा की समस्या शुरू होती है अगर ट्यूब अधूरा बंद होता है जिससे स्पाइन में किसी तरह की दरार बन जाती है।
यह भी जानें
स्पाइना बिफिडा स्पाइनल कॉलम से जुड़ा जन्मदोष है। माइलोमेनिंगोसील एक गंभीर तरह का स्पाइना बिफिडा है। 1,000 में से एक बच्चा माइलोमेनिंगोसील स्पाइना बिफिडा के साथ पैदा होता है। स्पाइना बिफाडा में, स्पाइनल कॉलम संक्रमित होने के लिए काफी असंवेदनशील माना जाता है क्योंकि ये खुला होता है। मरीज बहुत ही ज्यादा सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड पैदा करते हैं जिससे हाइ्रोसिफेलस बन जाता है। हाइ्रोसिफेलस से ये और भी अधिक खतरनाक हो जाता है। स्पाइना बिफिडा के सही कारण का अब तक पता नहीं चला है। डायबिटिज से पीड़ित महिलाओं को स्पाइना बिफिडाग्रस्त बच्चे पैदा होने के ज्यादा चांस होते हैं। इसमें दरार वाली जगह के नीचे की पेशियां कमज़ोर हो जाती हैं या उसके नीचे के हिस्से में लकवा मार जाता है। कई मामलों में मल-मूत्र विसर्जन पर नियंत्रण नहीं रह जाता।
तीन तरह का है स्पाइना बिफिडा
स्पाइना बिफ़िडा ओक्युल्टा: रीढ़ की हड्डियों को नुकसान पहुंचाए बिना उसमें एक छेद होता है।
मेनिंगोसील: रीढ़ की हड्डी में एक छेद होता है जिससे मेरुरज्जु की सुरक्षा कवच में दबाव के कारण वो थैली के रूप में बाहर बनकर आ जाती है। इसे मेनिंगोसील कहते हैं। इसमें मेरुरज्जु सुरिक्षत रहती है और नर्वस सिस्टम को मामूली क्षति पहुंचाकर या बिना कोई क्षति पहुंचाये इसकी मरम्मत की जा सकती है।
माइलोमेनिंगोसील: यह गंभीर तरह का स्पाइना बिफ़िडा है। इसमें मेरुरज्जु का एक हिस्सा पीठ की तरफ़ से बाहर निकल कर आ जाता है। कुछ मामलों में ये स्पाइना बिफिडा पुटिका त्वचा से ढंकी रहती है, तो कुछ में ऊतक और तंत्रिकाएं अनावृत हो जाती हैं।
इसके लक्षण
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(इनपुट: आईएएनएस)
चित्रस्रोत: Shutterstock.