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Spectacles to Save from Coronavirus : कोरोनावायरस से लड़ रहे यौद्धाओं स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, सफाई कर्मचारियों जैसे अन्य लोगों को कोविड-19 के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक सुरक्षात्मक चश्मा विकसित किया है। वैज्ञानिकों द्वारा तैयार इस चश्मे से कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ रहे लोगों को संक्रमण से बचने में सहायक हो सकता है। इस चश्मे का इस्तेमाल आम लोग भी कर सकते हैं। इस वजह से इस चश्मे का उत्पादन बड़े पैमाने पर करने की (Spectacles to Save from Coronavirus) तैयारी शुरू कर दी गई है।
इस चश्मे का उत्पादन बड़े पैमाने पर करने के लिए सीएसआईआर ने चंडीगढ़ की कंपनी सार्क इंडस्ट्रीज से समझौता कर लिया है। इस कंपनी द्वारा चश्मा तैयार किया जाएगा। वैज्ञानिकों ने इसकी तकनीक, इस कंपनी को (Spectacles to Save from Coronavirus) सौंप दिया है।
इस चश्मे की खोज केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ), चंडीगढ़ के वैज्ञानिकों ने की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, उन्होंने इस सुरक्षात्मक चश्मे में फ्रेम काफी लचीला लगाया है, ताकि यह स्किन के साथ प्रभावी सीलिंग के रूप में आंखों के ऊपर एक रोधक के रूप में काम कर सके। इस चश्मे में प्रिस्क्रिप्शन ग्लास भी लगा सकते हैं। इस चश्मे में को आसानी से पहनने के लिए इलास्टिक पट्टे का इस्तेमाल किया गया है, साथ ही इसे मजबूत पॉलीकार्बोनेट लेंस से तैयार किया गया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारी पलकों के अंदर आंख की पुतलियों को चिकनाई देने के लिए आखों में नेत्र श्लेषमला झिल्ली होती है। यह शरीर में एकमात्र आवरण रहित श्लेष्म झिल्ली होती है। जब हमारी आंखे खुलती हैं तो नेत्र श्लेषमला झिल्ली बाहरी वातावरण के संपर्क में आती है, जो अनजाने में आंखों के जरिए वायरस हमारे शरीर में प्रवेश का कारण बन सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह चश्मा इस चुनौती से लड़ने में कारगर साबित हो सकता है।
सीएसआईओ के ऑप्टिकल डिवाइसेज एंड सिस्टम्स विभाग के प्रमुख डॉ विनोद कराड़ के अनुसार, "इस चश्मे की तकनीक को विकसित करने के लिए उद्योगों और संबंधित हितधारकों के सुझावों को भी (Spectacles to Save from Coronavirus) शामिल किया गया है।"
सीएसआईओ के निदेशक डॉ संजय कुमार के अनुसार, प्रयोगशाला के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप इस तकनीकी का विकास हुआ है, जो कोविड-19 का मुकाबला करने के उद्देश्य तैयार किया गया है। इस परियोजना से जुड़ीं प्रमुख शोधकर्ता डॉ. नेहा खत्री ने कहा, "इस चश्मे को विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में उपयोग किया जा सकता है।"
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सीएसआईओ में बिजनेस इनिशिएटिव्स ऐंड प्रोजेक्ट प्लानिंग के प्रमुख डॉ सुरेंदर एस. सैनी ने बताया, "इस सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा आम लोग भी कर सकते हैं।"
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