
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 14, 2024 12:36 AM IST
Smoking and risk of early menopause: ज्यादा स्मोकिंग करने वाली महिलाओं में जल्द मेनोपॉज का रिस्क (Risk of early menopause in women) अन्य महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। इस स्टडी के अनुसार,धूम्रपान करने वाली महिलाओं में जल्दी मेनोपॉज होने का खतरा ज्यादा होता है। मेनोपॉज वो फेज है जब महिलाओं को पीरियड्स (periods) आना बंद हो जाता है। आम तौर पर यह फेज 40-50 साल की उम्र में शुरू होता है, लेकिन स्मोकिंग करने वाली महिलाओं में ये उम्र कम हो सकती है और उनका मेनोपॉज जल्द शुरू हो सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार अर्ली मेनोपॉज या जल्द शुरू होनेवाा मेनोपॉज महिलाओं की हेल्थ के लिए कई तरह से नुकसानदायक साबित हो सकता है। (Side effects or early menopause)
सिगरेट में निकोटीन (Nicotine) नाम का पदार्थ होता है, जो महिलाओं के अंडाशय (ovary) को कमजोर बनाता है। इससे महिलाओं में फीमे एग्ज (female eggs) कम बनते हैं और मेनोपॉज जल्दी आ जाता है।
इसी तरह स्मोकिंग करने से शरीर में एस्ट्रोजन नाम के हॉर्मोन का निर्माण भी कम होता है। एस्ट्रोजन (oestrogen) हड्डियों को मजबूत रखने का काम करता है और हार्ट डिजिजेज से भी बचाता है। इस हार्मोन की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और दिल की बीमारियों का रिस्क भी बढ़ सकता है। ( effects of low oestrogen level in the body)
स्टडी में बताया गया है कि जो महिलाएं स्मोकिंग करती हैं उनमें मेनोपॉज गैर-धूम्रपान करने वाली महिलाओं से 1-2 साल पहले आ सकता है। जितनी ज्यादा सिगरेट पी जाती है, उतना ही जल्दी मेनोपॉज आने का खतरा बढ़ता जाता है।
वहीं, स्मोकिंग करने वालीमहिलाओं में हड्डी टूटने का खतरा भी अधिक होता है।
धूम्रपान करने से ना केवल आपके फेफड़े खराब होते हैं बल्कि आपकी हड्डियों, दिल और दूसरे ऑर्गन्स को भी नुकसान पहुंचता है। इसीलिए महिलाएं अगर स्मोकिंग की आदत छोड़ दें तो इन सभी हेल्थ प्रॉब्लम्स और बीमारियों के खतरे को कम कर सकती हैं और एक हेल्दी जिंदगी जी सकती हैं।
(IANS)
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।