जरूरत से कम सोने वालों को हो सकती है अल्जाइमर और मस्तिष्क संबंधी बीमारियां, नयी स्टडी में खुलासा

कुछ समय पहले आयी एक स्टडी में कहा गया है कि, अगर कोई व्यक्ति पूरी नींद नहीं लेता तो उसका दिमाग खुद को ही खाने लगता है। यह स्थिति अल्ज़ाइमर आदि की वजह भी बन सकता है। रिसर्चर्स के अनुसार, आव्यश्यकता से कम नींद लेने से मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है।  

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : August 12, 2020 11:36 AM IST

Sleep and Mental Health: 8 घंटे की नींद पर्याप्त और सेहत के लिए सही मानी जाती है। लेकिन, अगर कोई व्यक्ति इससे अधिक या कम समय तक सोता है , तो सेहत पर इसके दुष्परिणाम हो सकते हैं। पर्याप्त नींद सोने से लोग दिनभग फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस करते हैं। इसी तरह नींद पूरी होने से दिमाग से जुड़ी बीमारियों का रिस्क भी कम होता है। लेकिन, अगर कोई पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेता। तो, उसे कई प्रकार की दिमागी बीमारियां हो सकती हैं। जिनमें, अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया जैसे नाम भी शामिल हैं। (Sleep and Mental Health in hindi)

कुछ समय पहले आयी एक स्टडी में कहा गया है कि, अगर कोई व्यक्ति पूरी नींद नहीं लेता तो उसका दिमाग खुद को ही खाने लगता है। यह स्थिति अल्ज़ाइमर आदि की वजह भी बन सकता है। रिसर्चर्स के अनुसार, आव्यश्यकता से कम नींद लेने से मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। (Side Effects of Sleeping Less)

कम सोने से होती हैं दिमागी बीमारियां:

यह स्टडी साल 2017 में की गयी। जहां, इटली की मार्क पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी में रिसर्चर्स ने कम नींद से उत्पन्न होने वाली मानसिक स्थितियों को समझने की कोशिश की। वैज्ञानिकों नें चूहों को दो ग्रुप्स में बांटते हुए कुछ खास परिस्थितियों में रखा गया। इसका उनके मस्तिष्क पर क्या असर पड़ता है यह समझने के प्रयास किए गए। स्टडी के दौरान एक समूह के चूहों को पर्याप्त समय तक सोने दिया गया।  लेकिन, दूसरे ग्रुप के चूहों को 5 दिनों तक जगाकर रखा गया। (Sleep and Mental Health)

यह स्टडी 'न्यू साइंटिस्ट' जर्नल में छापी गयी। जिसमें, लिखा गया कि, देर तक सोने वाले चूहों के दिमाग में साइनैप्स (synapse) में एस्ट्रोसाइट (astrocytes) 6 प्रतिशत तक सक्रिय रहे। जबकि, कम नींद पाने वाले चूहों में एस्ट्रोसाइट की सक्रियता 8 प्रतिशत तक पायी गयी। जबकि, कभी ना सो पाने वाले चूहों में एस्ट्रोसाइट की सक्रियता 13.5 फीसदी रही। (Side Effects of Sleeping Less)

दरअसल, एस्ट्रोसाइट की सक्रियता दिमाग में अतिरिक्त न्यूरोन्स को अलग रखता है। इस स्टडी के दौरान देखा गया कि, कम नींद मिलने से एस्ट्रोसाइट, साइनैप्सेज़ के कुछ विशेष हिस्सों को खाने का काम करने लगते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह स्थिति कम अवधि की भी हो सकती है। जिसमें, दिमाग को नुकसीन नही होता। लेकिन, बहुत समय या लम्बी अवधि के लिए ऐसा होने से, अल्ज़ाइमर जैसी दिमागी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। (Side Effects of Sleeping Less  in hindi)

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