
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : June 8, 2021 10:06 AM IST
मरीजों में साइड इफेक्ट दिख रहे हैं इसलिए अस्पताल पोस्ट कोविड मरीजों के ट्रीटमेंट के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करेगा।
इंदौर के एक सरकारी अस्पताल में ब्लैक फंगस का इंजेक्शन लियोफिलाइज्ड एम्फोटेरिसिन बी (lyophilised Amphotericin B) लेने के बाद मरीजों में साइड इफेक्ट दिखे हैं। ऐसे में महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर संजय दीक्षित का कहना है कि क्योंकि एग्जिस्टिंग (पहले से इस्तेमाल हो रहे) इंजेक्शन से मरीजों में साइड इफेक्ट दिखे हैं, इसलिए अस्पताल अब ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज करने के लिए लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी (liposomal Amphotericin B) इंजेक्शन का उपयोग करेगा। डॉक्टर संजय दीक्षित का कहना है कि राज्य सरकार ने ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज करने के लिए उनके अस्पताल को हाल ही में लियोफिलाइज्ड एम्फोटेरिसिन बी (lyophilised Amphotericin B) इंजेक्शन की 3 हजार खुराकें दी है। लेकिन मरीजों में साइड इफेक्ट दिख रहे हैं इसलिए अस्पताल पोस्ट कोविड मरीजों के ट्रीटमेंट के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करेगा।
"हालांकि लियोफिलाइज्ड एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन काफी सस्ता है और इसका उपयोग सालों से किया जा रहा है। लेकिन 30 से 70% मरीज लोग ऐसे हैं जिन्हें इंजेक्शन लेने के बाद साइड इफेक्ट महसूस हुए हैं। जिसमें सबसे कॉमन है ठंड लगना है। हालांकि ये कोई खतरनाक साइड इफेक्ट नहीं है लेकिन फिर भी मरीजों को प्राथमिकता देते हुए ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए अब केवल लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी (liposomal Amphotericin B) इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाएगा। हमें इसकी पर्याप्त मात्रा में डोज मिल रही है।"
बता दें कि, मध्य प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश स्थित एक कंपनी से लियोफिलाइज्ड इंजेक्शन की 25,000 डोज खरीदने का फैसला किया था, जिसमें से 12,000 इंजेक्शन कुछ दिन पहले इंदौर स्पेशल एयरक्राफ्ट द्वारा लाए जा चुके हैं। इन 12,000 इंजेक्शन में से 3,000 इंजेक्शन महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज को दिए गए जबकि बाकी को राज्य के अन्य जिलों के लिए रवाना किया गया।
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