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मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, हालांकि ज्यादातर लोग इस विकार को चक्कर आने से जोड़ते हैं। मिर्गी एक केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Neurological) विकार है जिसमें मस्तिष्क गतिविधि असामान्य हो जाती है, जिससे दौरे या असामान्य व्यवहार, सेनसेशन और कभी-कभी चेतना कम हो जाती है।
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किसे हो सकती है मिर्गी की समस्या
मिर्गी किसी भी उम्र के लोगों तथा महिला और पुरुष दोनों को प्रभावित कर सकती है। इसके मुख्य लक्षण में मरीज को दौरा पड़ता है। हालांकि एक बार दौरा पड़ने का मतलब यह नहीं है कि मरीज को मिर्गी की समस्या है। मिर्गी में मरीज को बार-बार दौरे पड़ते हैं। यदि अकारण दौरा पड़ता है और वह बार-बार होता है तो मरीज को इसकी जांच जरूर करवानी चाहिए। मिर्गी में पड़ने वाले दौरे को दवाई तथा कुछ मामलों में सर्जरी करके कंट्रोल किया जा सकता है। कुछ मामलों में पूरी जिंदगी दौरे को कंट्रोल करने के लिए उपचार की जरूरत होती है।
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ये हो सकते हैं मिर्गी के कारण
मिग्री के लक्षण
अस्थायी भ्रम
हाथ और पैरों को झटकना
चेतना या जागरूकता में कमी
मानसिक लक्षण जैसे भय, चिंता
योग देता है मिर्गी में राहत
योगासन तन और मन को संतुलित करने का बेहतर तरीका है। मिर्गी मन और तन दोनों को प्रभावित करता है। इसलिए इस रोग के होने पर मरीजों को दवाओं के साथ-साथ योगासन का भी सहारा लेना चाहिए। इसके लिए कुशल प्रशिक्षक की देखरेख में अनुलोम विलोम प्रणायाम, कपालभाति और ताड़ासन किया जा सकता है। कुछ लोग ताडासन को हाइट बढ़ाने के लिए मानते हैं। ताड़ासन पूरे शरीर को लचीला बनाने के साथ ही मिर्गी में भी आराम दिलाता है।