AIIMS की स्टडी में बताया गया कोरोना मरीजों के लिए संक्रमण का दूसरा सप्ताह बेहद गंभीर,ये ग़लतियां पड़ सकती हैं भारी

कोरोना संक्रमण के दूसरे सप्ताह में ऐसा होता है जब संक्रमण बहुत अधिक गम्भीर हो जाता है और लोगों को इसी अवधि में अस्पताल में भर्ती कराने की ज़रूरत पड़ती है। (Second week of covid-19 infection is important)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 19, 2021 1:56 PM IST

Second week of covid-19 infection is important: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान यानि एम्स  (All India Institute of Medical Sciences)ने कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़े एक रिसर्च के परिणाम सार्वजनिक किया है। इस रिसर्च में बताया गया है कोरोना संक्रमण के दूसरे सप्ताह में ऐसा होता है जब संक्रमण बहुत अधिक गम्भीर हो जाता है और लोगों को इसी अवधि में अस्पताल में भर्ती कराने की ज़रूरत पड़ती है। इसीलिए संक्रमण का दूसरा सप्ताह मरीज़ों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इस स्टडी के अनुसार, अगर जल्द से जल्द मरीज़ों को आवश्यक चिकित्सा और मेडिकल सपोर्ट मिल जाए तो कोविड-19 संक्रमण से होने वाली मौत का रिस्क (Risk Of Covid-19 Death) एक तिहाई तक टाला जा सकता है। (Second week of covid-19 infection is important in Hindi)

दूसरे सप्ताह में अस्पताल में भर्ती होने और कोविड डेथ का रिस्क है अधिक

मिली जानकारी के मुताबिक राजस्थान के झज्‍जर (AIIMS Jhajjar) में स्थित सेंटर में एम्स के शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च की। इस रिसर्च के दौरान सेंटर में अप्रैल 2021 से जून 2021 की अवधि में भर्ती होनावाले कोरोना संक्रमित मरीजों की केस स्टडी की गयी। इन सभी मरीजों में कोविड 19 संक्रमण की गंभीरता के लिए  संभावित कारकों का विश्‍लेषण किया गया जिसके  बाद डॉक्‍टर इस निष्‍कर्ष पर पहुंचे। मिली जानकारी के अनुसार एम्स के झज्‍जर स्थित सेंटर में इन 3 महीनों में 2080 कोविड-19 संक्रमित व्यक्तियों को भर्ती कराया गया था। जिनमें से 406  (लगभग 20 प्रतिशत) कोविड मरीज़ों की मृत्यु हो गई थी। (Second week of covid-19 infection is important)

वैक्सीनेशन से घट सकता है 30 प्रतिशत मौत का खतरा

एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोविड संक्रमण होने के बाद तीसरे-चौथे सप्ताह में अस्पताल में भर्ती होने की आशंका अधिक होती है। वहीं, बुज़ुर्गों को उम्र के साथ होनेवाली स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनमें भी कोविड-19 डेथ का रिस्क अधिक होता हैं। बुज़ुर्गों में वैक्सीनेशन से मौत का खतरा 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है। वहीं, संक्रमण के सेकेंड वीक में अगर कोविड संक्रमितों को मरीजों को आवश्यक मेडिकल सपोर्ट मिल जाए तो उनमें मृत्यु का रिस्क 36 प्रतिशत कर कम हो सकता है।

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