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सेकंड हैंड ड्रिंकिंग (Second Hand Drinking) दुनिया भर में बढ़ती जा रही परेशानियों में शुमार होने लगी है। तकरीबन पांच करोड़ से ज्यादा लोग सेकंड हैंड ड्रिंकिंग की वजह से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। क्या आप जानते हैं कि आखिर क्या है सेकंड हैंड ड्रिंकिंग और यह कैसे एक बड़ी समस्या बनती जा रही है।
सेकंड हैंड ड्रिंकिंग यानी किसी और के ऐल्कॉहॉल का सेवन करने का बुरा असर आपकी सेहत पर पड़ना। आपके परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या सहकर्मी के ड्रिंक करने की वजह से आपको जो मानसिक, भावनात्मक, शारीरिक और आर्थिक चोट पहुंचती है उसे इन खतरों में शामिल किया जाता है। यह दुनिया भर में बढ़ती जा रही भयावह समस्याओं में से एक है।
भारतीय मूल की वैज्ञानिक मधाबिका बी नायक ने एक स्टडी की है जिसमें सेकंड ड्रिंकिंग के खतरों के बारे में बताया गया है। अमेरिका के नैशनल सर्वे डेटा के नतीजों की जांच करने पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। इनमें करीब 21 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष यानी करीब 5 करोड़ 30 लाख ऐसे वयस्क थे जो सेकंड हैंड ड्रिंकिंग के शिकार हुए। इन पर पिछले 12 महीने में दूसरों द्वारा ऐल्कॉहॉल का सेवन करने का बुरा असर नजर आया। इनमें सेहत से जुड़े खतरे ही नहीं बल्कि धमकी, उत्पीड़न, प्रॉपर्टी को खतरा, तोड़फोड़, शारीरिक छेड़छाड़ के मामले, गाड़ी चलाते वक्त दूसरों को नुकसान पहुंचाना और आर्थिक या पारिवारिक समस्याएं शामिल हैं।
कैलिफॉर्निया के ऑकलैंड स्थित पब्लिक हेल्थ इंस्टिट्यूट के ऐल्कॉहॉल रिसर्च ग्रुप की अनुसंधानकर्ता मधाबिका बी नायक ने कहा, सेकंड हैंड ड्रिंकिंग की वजह से जो सबसे ज्यादा नुकसान देखने को मिलता है वह है धमकी और शारीरिक उत्पीड़न। इस पर किए गए सर्वे में 16 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इस बात को स्वीकार भी किया। सेकंड हैंड ड्रिंकिंग की वजह से महिलाओं को जहां आर्थिक और पारिवारिक समस्याएं अधिक होती हैं, वहीं पुरुषों को प्रॉपर्टी में तोड़फोड़, गुंडागर्दी, शारीरिक मारपीट जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
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इस वजह से घरेलू हिंसा, क्राइम के भी मामले बढ़ने लगे। इतना ही नहीं, ड्रिंक कर ड्राइव करने की वजह से सड़क हादसे भी होने लगे। © Shutterstock[/caption]
ऐल्कॉहॉल का इस्तेमाल पहले उपचार के लिए होता था, लेकिन समय के साथ लोग इसका दुरुपयोग करने लगे। जरूरत से ज्यादा मात्रा में ड्रिंक करने लेने लगे और धीरे-धीरे ऐल्कॉहॉल अडिक्शन का शिकार हो गए। इस वजह से घरेलू हिंसा, क्राइम के भी मामले बढ़ने लगे। इतना ही नहीं, ड्रिंक कर ड्राइव करने की वजह से सड़क हादसे भी होने लगे।
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स्टडीज ऑन ऐल्कॉहॉल ऐंड ड्रग्स नाम के जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि घर में मौजूद पुरुष अगर बहुत ज्यादा शराब का सेवन करता है, तो महिलाओं को सबसे ज्यादा रिस्क होता है। वहीं, पुरुषों को परिवार के बाहर के शराबियों से खतरा अधिक होता है। 25 साल से कम उम्र के लोगों में किसी और के द्वारा शराब पीकर उन्हें नुकसान पहुंचाने का खतरा काफी अधिक था।
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नायक कहती हैं, शराब से जुड़ी पॉलिसी को नियंत्रित करना, शराब की कीमत, टैक्सेशन, इन चीजों की उपलब्धता में कमी लाना और इनके विज्ञापन पर रोक लगाने जैसे कारगर कदमों को उठाकर ही ऐल्कॉहॉल के सेवन में कमी लायी जा सकती है। साथ ही ऐसा करने से खुद शराब पीकर दूसरों को नुकसान पहुंचाने के मामले में भी कमी लायी जा सकेगी।