अब कभी बूढ़े नहीं होंगे आप! वैज्ञानिकों ने निकाली ऐसी अनोखी तकनीक

उम्र के साथ-साथ चेहरे पर झुर्रियां आने लगती हैं। इतना ही नहीं बूढ़ापे में हड्डियां कमजोर, कार्य करने की क्षमता पर असर, याददाश्त कमजोर होने लगती हैं। लेकिन अब आपके अंदर ऐसे लक्षण पर वैज्ञानिक कंट्रोल कर सकते हैं।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : July 23, 2020 9:31 AM IST

Aging Cells Test : आज के समय में कोई भी व्यक्ति बूढ़ा नहीं होना चाहता है। लेकिन एक इंसान के लिए ऐसा मानों असंभव सा है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती है, स्किन लटक जाती है, इतना ही नहीं देखने की क्षमता और याददाश्त भी कमजोर पड़ने लगती है। अब आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है, वैज्ञानिकों ने आपको बुढ़ापे के इन लक्षणों से बचने का उपाय ढूंढ (Aging Cells Test) लिया है।

यीस्ट पर किया वैज्ञानिकों ने अध्ययन

जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया, सैनडियागो (यूसीएसडी) के वैज्ञानिकों द्वारा यीस्ट यानी खमीर पर ‘एजिंग’ का असर जानने के लिए एक स्टडी की है। वैज्ञानिकों ने इस स्टडी में देखा कि क्या खमीर की कोशिकाओं में आसानी से बदलाव लाए जा सकते हैं या नहीं। साथ ही वैज्ञानिकों को यह भी पक्का करना था कि क्या कोशिकाएं अलग-अलग समय में अलग-अलग दर से ही बूढ़ी होती हैं और क्या उन सभी का लक्ष्य एक ही होता है?

अपने इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह सच नहीं है। उन्होंने अपने अध्ययन में देखा कि एक ही जैसे वातावरण में पलने वाली समान जेनेटिक मेटीरियल की कोशिकाएं अलग-अलग ढंग से बूढ़ी होती हैं। अध्ययन में शामिल की गई कोशिकाओं में भी आधी कोशिकाएं इसलिए बूढ़ी हुईं, क्योंकि उनके न्यूक्लियस के चारों ओर का घेरा ‘न्यूक्लिओलस’ नष्ट होने लगा था। कम्यूटर मॉडलिंग और अन्य जटिल टेक्नीक के इस्तेमाल से वैज्ञानिक इस असाधारण (Aging Cells Test) नतीजे पर पहुंचे हैं।

वहीं, दूसरी ओर आधी कोशिकाएं इसलिए बूढ़ी हुईं क्योंकि उनके अंदर मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया ने सामान्य रूप से काम करना बंद कर दिया था। बता दें कि कोशिकाओं का यह अंग ऊर्जा उत्पन्न करने के काम आता है। वैज्ञानिकों ने देखा कि शरीर में मौजूद कोशिकाओं के नष्ट होने के दो तरीके होते हैं - न्यूक्लियर या माइटोकॉन्ड्रियल।

अपने इस स्टडी के बारे में सीनियर ऑथर नान हाओ ने सीएनएन को कहा, "हमने हर एजिंग रूट के मॉलिक्यूलर प्रोसेस और उनके बीच के कनेक्शन को ढूंढा, उस मॉलिक्यूलर सर्किट को खोजा जो बूढ़ा करने वाली कोशिकाओं को नियंत्रित करता है।"

वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी

वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में बहुत ही बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने "एजिंग लैंडस्केप" को स्थापित करके बूढ़ा होने की प्रक्रिया में हेरफेर करके पूरी प्रक्रिया में बदलाव ला दिया। वैज्ञानिकों को यह कामयाबी कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव करके मिली है। अध्ययन के अनुसार,  वैज्ञानिक एक ‘अनूठा एजिंग रूट’ बनाने में सफल थे, जिसने कोशिकाओं का जीवन और भी लंबा कर दिया। इस तरह के बदलाव को समझने के बाद बूढ़ा होने की प्रक्रिया में देरी लाई जा सकती है। मेडिकल क्षेत्र में यह एक बड़ी कामयाबी है।

हालांकि, अभी यह टेस्ट खमीर कोशिकाओं पर किया गया है। इंसानों पर परीक्षण करने से पहले वैज्ञानिक इससे अधिक जटिल कोशिकाओं पर यह परीक्षण करेंगे। उसके बाद कुछ जीवों पर इसका परीक्षण किया जाएगा।

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