20 देशों के वैज्ञानिकों के समूह ने कड़ी मेहनत के बाद गेंहू की एक ऐसी प्रजाति की खोज की है, जिसे कम पानी में भी ज्यादा पैदावार ली जा सकती है। मक्का के बाद यह सबसे ज्यादा उपभोग होने वाला अनाज है।
समय-समय पर ऐसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आती रहती हैं जो मानवता एवं उसकी जरूरतों के लिहाज से लाभदायक होती हैं ।
ऐसी ही एक जानकारी सामने आई है गेहूँ की एक नई प्रजाति को लेकर, वैैज्ञानिकों ने गेहूँ के एक ऐसे जीनोम की खोज की है जिसको 2016 में मक्के के बाद सबसे ज्यादा बोया गया ।
आने वाले समय में ये जीनोम सूखे की समस्या से निपटने में तो कारगर साबित होगा ही, इसके साथ ही इसकी तरह की और प्रजातियों को ढूंढ़ने में भी आसानी होगी ।
आने वाले 30 सालों में इंसानों को और ज्यादा गेहूँ की आवश्यकता पड़ेगी जिसकी कमी को इससे या इसकी भविष्य की अन्य प्रजातियों की सहायता से पूरा किया जा सकेगा क्योंकि इसकी कम पानी में भी ज्यादा पैदावार होगी ।
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