डायबिटीज रोगियों के लिए वैज्ञानिक कर रहे हैं आर्टिफिशियल पैंक्रियाज को तैयार! इंसुलिन रिलीज करने का करेगा काम

MIT ने एक रिलीज में बताया है कि वैज्ञानिक एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो डायबिटीज रोगियों के लिए आर्टिफिशियल पैंक्रियाज के रूप में काम करेगी।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 9, 2022 3:27 PM IST

डायबिटीज के उपचार में अक्सर इंप्लाटेबल डिवाइस और कैन्यूला का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि जब इन तरीकों को प्रयोग में लाया जाता है तो मरीज के ऑपरेशन वाले हिस्से में दाग रह जाते हैं। इस प्रक्रिया को फॉरेन बॉडी रिस्पॉन्स के रूप में जाना जाता है, जो समय दर समय मरीजों के लिए समस्या का कारण बन सकता है। इस समस्या को रोकने के लिए इंजीनियर्स ने एक ऐसी तकनीक इजात की है, जो दाग-धब्बों को रोकने में मदद करेगी। आइए जानते हैं कौन सी है ये तकनीक।

शरीर में इंसुलिन रिलीज करने का काम

MIT इंजीनियर्स ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो इंप्लाटेबल उपकरणों से होने वाले टिश्यू स्कार को रोकने में मदद कर सकता है। ये इंप्लाटेबल उपकरण शरीर में इंसुलिन रिलीज करने का काम करते हैं। MIT की एक रिलीज के मुताबिक, चूहों पर किए गए एक अध्ययन में ये पाया गया है कि जब एक सॉफ्ट रोबोटिक डिवाइस में मैकेनिकल एक्चुएशन को जोड़ा जाता है तो ये डिवाइस आम तौर पर प्रयोग होने वाले इंप्लांट की तुलना में ज्यादा वक्त तक काम करती है।

हर 12 घंटे में एक बार काम करती है ये तकनीक

शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गई ये नई डिवाइस हर 12 घंटे में 5 मिनट के लिए फूलती और वापस अपनी स्थिति में आती है। इस मैकेनिकल डेविएशन के साथ ये इम्यून कोशिकाओं को इंप्लांटेबल डिवाइस के आस-पास जमा होने से भी रोकती है।

कैसे ये तकनीक करेगी काम

MIT के इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल इंजीनियरिंग एंड साइंसेज के सदस्य और लैथम फैमिली कैरियर डेवलपमेंट एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग ऐलन रोच का कहना है कि हम इस तरह की चीजों का इस्तेमाल इंप्लांटेड उपकरणों की दक्षता और अवधि को बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। ये उपकरण इंसुलिन जैसी दवाओं को पहुंचाने का काम करता है और हमें लगता है कि इस मंच को इस एप्लीकेशन से परे ले जाया जा सकता है।

आर्टिफिशियल पैंक्रियाज पर काम जारी

फिलहाल रिसर्च इस बात को लेकर भी जारी है कि क्या इन उपकरणों का इस्तेमाल डायबिटीज के उपचारमें मदद करने वाले बायोआर्टिफिशियल पैंक्रियाज के रूप में भी किया जा सकता है या नहीं।

अध्ययन के मुख्य लेखक

रोचे इस अध्ययन के मुख्य सह लेखक हैं जबकि ईमीयिर डोलन, जो कि नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आयरलैंड के फैक्लिटी सदस्य हैं उन्होंने भी इस अध्ययन को करने में अहम भूमिका निभाई है।

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