कोविड संक्रमण से रिकवरी में मदद करता है नमक का पानी, गरारे करने से होंगे ये फायदे

नयी स्टडी में कहा गया कि नमक के गरारे से कोविड वायरल लोड को कम किया जा सकता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 10, 2023 10:06 PM IST

Salt Water Gargle Benefits: एक स्टडी में यह कहा गया है कि, नमक के पानी से गरारे करने से श्वसन मार्ग संबंधी बीमारियों से राहत मिलती है। इस स्टडी के निष्कर्षों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि नमक-पानी से गरारे करने से कोविड संक्रमण से लड़ने में मदद होती है और कोरोना संक्रमण के लक्षणों से आराम भी मिलता है। यह कोविड संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती होने की संभावना को भी कम करता है।

इसी साल कैलिफोर्निया में आयोजित किए जा रहे अमेरिकन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी की वार्षिक वैज्ञानिक बैठक में इस स्टडी के परिणाम भी प्रस्तुत किए जा रहे। स्टडी में यह पता चला कि गंभीर और तीव्र श्वसन सिंड्रोम सीओवी 2 यानि कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम में नमक वाले पानी से गार्गल करने की आदत काफी मददगार होती है। टेक्सास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की टीम ने 2020 से  2022 के बीच कोविड के गंभीर मरीजों का अध्ययन किया। स्टडी में पाया गया कि सलाइन वाला आहार लेने वाले लोगों की तुलना में नमक से गरारे करने वाले लोगों में रिकवरी के बेहतर संकेत दिखे।

श्वसन सिंड्रोम के संक्रमणों से राहत

यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिक जिमी एस्पिनोजा का कहना है कि, “ स्टडी के दौरान हमारा लक्ष्य यह था कि कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित लोगों में नमक के गरारे करने के बाद श्वसन संबंधी लक्षणों में कितनी गिरावट आती है, हम उसकी जांच करें। स्टडी के दौरान हमने पाया कि गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम या कोरोना वायरस 2 संक्रमण को रोकने में सलाइन आहार हॉस्पिटल में भर्ती होने के आसार कम कर देता है। हम यह उम्मीद कर रहे हैं कि इस दिशा में और अधिक रिसर्च किए जाएंगे।”

बता दें कि यह नयी स्टडी पिछली छोटी-छोटी स्टडीज के उन दावों का समर्थन करती है जिसमें कहा गया था कि नमक का गरारा करने से कोविड का वायरल लोड  कम किया जा सकता है। वहीं,  संक्रामक-रोग विशेषज्ञ भी इस स्टडी के निष्कर्षों की सराहना कर रहे है, जिन्होंने कहा है कि इसके लिए और अधिक रिसर्च करने की जरूरत है। हालांकि, यह कभी नहीं कहा जा सकता है कि नमक के गरारे करने से संक्रमण की दवा या वैक्सीनेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। गार्गल को उपचार की प्रक्रिया का पर्याय नहीं माना जा सकता।