अब मच्छरों से होने वाली बीमारियों का पता लगाएगी आरटीपीसीआर लैब, ICMR की नई पहल जल्द होगी शुरू

इन लैब्स में जिनोम मॉनिटरिंग की जाएगी, जो कि तेज गति से नतीजे देने और उच्च स्तरीय संवेदनशील जानकारी मुहैया कराने में प्रभावी है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : July 6, 2022 12:35 PM IST

पुडुचेरी के वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर (VCRC) के वैज्ञानिकों ने केंद्र के स्वास्थ्य अधिकारियों को कोविड-19 टेस्ट के लिए प्रयोग की जा रही RT-PCR लैब को दूसरे उद्देशयों के लिए यूज करने को लेकर पत्र लिखा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन लैब का प्रयोग मच्छर जनित बीमारियों के इंसानी संपर्क के जोखिम का अध्ययन करने के लिए किया जाना चाहिए। VCRC, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अंतर्गत काम करने वाली संस्था है। कोविड के बाद से भारत में 3,382 RT-PCR लैब बनाई गई हैं।

मच्छर जनित बीमारियों के लिए होंगी यूज

ICMR-VCRC के निदेशक डॉ. अश्विनी कुमार ने एक इंटरव्यू में कहा है कि कोविड के बाद क्या होगा? हमारे पास राज्य स्तर पर कई ऐसे उन्नत सुविधा केंद्र हैं, जिन्हें काम के लिए दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए हमने केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय से मच्छर जनित बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए इन लैब्स के फिर से इस्तेमाल करने के बारे में पत्र लिखा है।

1000 मच्छरों पर एक साथ नजर

उन्होंने कहा कि इन लैब्स में जिनोम मॉनिटरिंग की जाएगी, जो कि तेज गति से नतीजे देने और उच्च स्तरीय संवेदनशील जानकारी मुहैया कराने में प्रभावी है। ये एक दिन में 1000 मच्छरों के समूह से संक्रमित मामलों का पता लगाने में सक्षम है।

मॉनटरिंग का खास तरीका है ये

कुमार का कहना है कि मच्छर जनित बीमारियों के फैलने के खतरे का पता लगाने के दो तरीके हैं। एक तरीका ये है कि परजीवों व दूसरे वायरस जैसे जीवाणुओं पर नजर रखी जाती है और दूसरा तरीका ये है कि उन मच्छरों पर नजर रखी जाए, जो ये बीमारी फैलाते हैं। जिनोम मॉनिटरिंग वो तरीका है, जो बीमारी को फैलाने वाले मच्छरों पर निगरानी रखती है। ये हमें उन मच्छरों के बारे में जानकारी देने में मदद करेगी।

मच्छरों वाली बीमारी की पहचान

संस्थान ने ये फैसला किया है कि शुरू में कुलेक्स नाम के मच्छर की निगरानी की जाएगी, जो लिम्फैटिक फाइलेरियासिसको फैलाता है। भारत में अभी तक 328 जिलों में 480,000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। बाद में जिनोम मॉनिटरिंग नेटवर्क दूसरी जगहों पर पहचान के लिए प्रयोग की जाएगी।

इतने-इतने मामले आए सामने

केंद्र स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले निकाय नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल द्वारा जारी डेटा के मुताबिक, जनवरी से मई के बीच भारत में 10,172 डेंगू के मामले सामने आए हैं और तीन मौत हो चुकी हैं। अभी तक चिकनगुनिया के करीब 1554 मामले सामने आए हैं जबकि 62 मामले जापानी बुखार के हैं और दो लोगों की मौत हुई है। अप्रैल तक 21558 मलेरिया के मामले सामने आ चुके हैं और 4 लोगों की मौत हुई है।