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कोरोना वायरस का प्रभाव अभी तक भी कुछ लोगों के शरीर से गया नहीं है। कुछ लोग कोरोना से संक्रमित होकर पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि अन्य लोगों में कोरोना के बाद भी कई स्थायी समस्याएं महसूस हो रही हैं। पहले आई खबरों के अनुसार किसी को कोरोना के बाद किडनी तो किसी को फेफड़ों संबंधी समस्याएं होने लगी हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण का असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा है और इस पर कई स्टडी की जा चुकी हैं जिनमें पाया गया कि कोविड 19 का असर हमारी मानसिक स्थिति पर भी गंभीर असर डालता है। वैसे तो महामारी के कारण उन लोगों में भी मानसिक बीमारियों के लक्षण देखे जा चुके हैं, जो अभी तक संक्रमित ही नहीं हुए हैं। लेकिन हाल ही में एक नया शोध किया गया जिसमें पाया गया कि कोविड 19 से संक्रमित हो चुके लोगों में मानसिक बीमारियां होने का खतरा कितना बढ़ता है।
इस स्टडी मे पाया गया कि जिन वयस्कों की उम्र ज्यादा है और वे कोविड 19 से संक्रमित हो जाते हैं, तो उन्हें कम उम्र के वयस्कों की तुलना में मानसिक बीमारिया होने का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है। शोध के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाने के बाद इन लोगों में डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण देखने को मिले।
यह स्टडी जर्नल पीएनएएस (PNAS) में पब्लिश की गई जिसमें 52 से 74 की उम्र के बीच के लोगों पर अध्ययन किया गया। इस शोध में इन लोगों के मानसिक स्थितियों के साथ-साथ सामाजिक संपर्क और वित्तीय स्थितियों की जांच भी की गई। इस शोध में भाग लेने वाले लोगों के महामारी से पहले (2018-19) का डाटा और 2020 के बाद कोविड 19 की दो एसेस्मेट्स से जुड़ा डाटा लिया गया।
इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि ज्यादा उम्र वाले वयस्क जो कोविड 19 से संक्रमित हुए हैं उनमें लगभग 49 प्रतिशत लोगों में मानसिक रोगों से जुड़े लक्षण जैसे डिप्रेशन आदि देखे गए। वहीं जिन लोगों को कोविड 19 संक्रमण नहीं हुआ उनमें सिर्फ 22 प्रतिशत लोगों में ही डिप्रेशन आदि के लक्षण देखे गए।
अध्ययन में बताया गया कि मानसिक बीमारियों का ज्यादा प्रभाव कोरोना के पहले साल रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है, ऐसा कोरोना संक्रमण के शुरूआत में लगे प्रतिबंधों के कारण हो सकता है। अचानक से व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रतिबंध लगने के बाद काफी लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है।