जानें, क्यों बढ़ जाता है अल्जाइमर्स के मरीजों में हिप फ्रैक्चर का खतरा

हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि स्ट्रॉन्ग पेनकिलर ओपीओइडी के प्रयोग से अल्जाइमर रोग से जूझ रहे लोगों में हिप फ्रैक्चर होने का खतरा दोगुना हो जाता है।

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Written By: Anshumala | Updated : November 30, 2018 4:52 PM IST

यदि आप अल्जाइमर से पीड़ित हैं, तो आपको संभलकर रहना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे आपको फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ सकता है। यह बात हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आई है। इसमें कहा गया है कि स्ट्रॉन्ग पेनकिलर ओपीओइडी के प्रयोग से अल्जाइमर रोग से जूझ रहे लोगों में हिप फैक्चर होने का खतरा दोगुना हो जाता है।

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यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ इस्टर्न फिनलैंड में किया गया। इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ओपीओइडी गिरने के जोखिम को बढ़ा देता है, जिससे बुजुर्गों के हिप फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

यह अध्यनन पैन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में पाया गया कि कमजोर ओपीओइडी जैसे कोडेइन और ट्रामाडोल का उपयोग हिप फ्रैक्चर के जोखिम से जुड़ा नहीं था।

हालांकि, बुप्रेनोरफिन जैसे थोड़े मजबूत ओपीओइडी के उपयोग से जोखिम दो गुना बढ़ जाता है।  इस अध्ययन में अल्जाइमर से पीड़ित 23,100 लोगों को शामिल किया गया।

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अध्ययन में यह भी पाया गया कि ओपीओइडी के प्रयोग से पहले दो महीनों में जोखिम सबसे ज्यादा था और उसके बाद यह थोड़ा कम हो गया।

क्या होते हैं शुरुआती लक्षण

अल्जाइमर रोग के प्रारंभिक लक्षणों में व्यक्ति को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी होती है। फोन मिलाने और किसी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत आने लगती है। कोई फैसला लेने की क्षमता कम हो जाती है, चीजें इधर-उधर रखकर भूल जाते हैं, शब्द भूलने लगते हैं, जिससे सामान्य बातचीत में रुकावट आती है। अपने घर के आसपास की गलियों, रास्तों को भूल जाते हैं और उनके रोजमर्रा के व्यवहार में बहुत तेजी से बदलाव आता है।

अल्जाइमर से यूं करें खुद का बचाव

अल्जाइमर की बीमारी आमतौर पर वृद्धावस्था में होती है लेकिन आजकल इससे युवा भी अछूते नहीं हैं। खानपान, जीवनशैली के परिवर्तनों के कारण यह समस्या युवाओं में भी प्रकट हो रही है। इससे बचना है, तो परिवार के सदस्य या किसी भी दोस्त में इसके लक्षण दिखें तो अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। नियमित व्यायाम करें, पौष्टिक भोजन करें। पीड़ित को अवसाद (डिप्रेशन) से बचाएं, अकेला न छोड़ें। यदि रोगी को रक्तचाप समस्या, मधुमेह, हृदय रोग हैं तो उनकी समुचित चिकित्सा कर नियंत्रण में रखें। पीड़ित को तंबाकू, अल्कोहल इत्यादि व्यसनों से मुक्त करें। यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रही है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चल सकती है। इस रोग के प्रारंभिक लक्षण याद्दाश्त में कमी, भौतिक वातावरण और भाषा में बाधा आदि है।

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