
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : August 8, 2022 9:55 AM IST
मंकीपॉक्स धीरे-धीरे दुनिया में अपने पैर पसार रहा है, भारत में भी एक के बाद एक कई केस आने के बाद इसका खतरा मंडराने लगा है। लोगों को मन में भय है कि कोरोना की तरह मंकीपॉक्स भी लोगों के बीच तेजी से ना फैलना शुरू हो जाए। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स ने कहा था कि रिंग वैक्सीनेशन की मदद से मंकीपॉक्स के मामलों से निपटा जा सकता है। हाल ही में फ्रांस की एक यूनिवर्सिटी में हुए शोध में यह पाया गया कि मंकीपॉक्स से निपटने के लिए सिर्फ रिंग वैक्सीनेशन स्ट्रेटजी काफी नहीं है। फ्रांस की यूनिवर्सिटी पेरिस साइट (Paris Cité) के साथ काम करने वाली एक स्टडी टीम ने इस पर अध्ययन किया और इसे नाकाफी बताया। शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है कि रिंग वैक्सीनेशन से किया गया टीकाकरण काम नहीं कर सकता।
आपके लिए यह भी जानना जरूरी है कि रिंग वैक्सीनेशन वास्तव में क्या है। कुछ लोग इसी एक वैक्सीन ही समझ रहे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। यह कोई वैक्सीन नहीं बल्कि टीकाकरण रणनीति है। इसमें रणनीति में पूरी आबादी को वैक्सीन लगाने की बजाय पहले उन लोगों को टीका लगाया जाता है, जिन्हें संक्रमण होने का खतरा अधिक हो। उदाहरण के लिए मरीज के संपर्क में आए या जो व्यक्ति संपर्क में आ सकते हैं आदि को वैक्सीन पहले लगा दी जाती है।
20वीं शताब्दी में चेचक की रोकथाम करने के लिए भी रिंग वैक्सीनेशन को ही अपनाया गया था। वहीं जब पश्चिम अफ्रीका में इबोला फैल गया था, तो उससे निपटने के लिए भी इसी टीकाकरण रणनीति को अपनाया गया था। उस दौरान चेचक या इबोला से संक्रमित व्यक्ति के परिवार सदस्य, मित्र और पड़ोसियों को टीका लगाया जाता था, ताकि यह संक्रमण आगे न फैल पाए।
मंकीपॉक्स से निपटने के लिए एक्सपर्ट्स ने इस स्ट्रेटजी को अपनाने की सलाह दी थी। लेकिन पेरिस साइट यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध ने इसे मंकीपॉक्स को फैलने से रोकने के लिए नाकाफी बताया। शोध के दौरान उन लोगों की निगरानी की गई जिन्होंने गंभीर रूप से संक्रमित होने के बाद IMVANEX वैक्सीन लगवाई थी।