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गर्भाशय में धंस गया था प्लेसेंटा, मां-बच्चे की खतरे में थी जान,मेडिकल टीम ने ऐसे पूरी की सर्जरी, पढ़ें डिटेल्स

प्लेसेंटा पूरी तरह से महिला की गर्भाशय की दीवार से चिपक गया था और मेडिकल टीम के लिए एक बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

गर्भाशय में धंस गया था प्लेसेंटा, मां-बच्चे की खतरे में थी जान,मेडिकल टीम ने ऐसे पूरी की सर्जरी, पढ़ें डिटेल्स

Written by Sadhna Tiwari |Updated : November 28, 2023 7:59 PM IST

Retained Placenta: मुंबई में चाइल्डबर्थ का एक मुश्किल केस में डॉक्टरों को सफलता मिली है। इस मामले में डॉक्टरों और नर्सों की एक महिला टीम ने एक प्रेगनेंट महिला की गर्भाशय की दीवारों से चिपकी प्लेसेंटा को हटाने और इस मुश्किल सिजेरियन सेक्शन सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा करने में कामयाबी हासिल की।

मिली जानकारी के अनुसार, एक 32 वर्षीय महिला को 16 नवंबर को अंधेरी के वीएन देसाई अस्पताल में डिलिवरी के लिए ले जाया गया। जहां वरिष्ठ सलाहकार और डीएनबी शिक्षिका डॉ. कोमल चव्हाण की अगुवाई में इस केस को हैंडल किया गया। डॉ.चव्हाण ने बताया कि, शुरूआत में इसे एक नॉर्मल सीजेरियन सेक्शन डिलिवरी केस की तरह देखा जा रहा था, लेकिन यह किसी भी गाइनोकोलॉजिस्ट के लिए किसी बुरे से सपने से कम नहीं हो सकता। इस मामले में मां और बच्चे दोनों के लिए स्थिति बहुत गम्भीर और घातक हो सकती थी।

बेहत चुनौतिपूर्ण थी डिलिवरी

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए डॉ. चव्हाण ने. “यह प्रेगनेंसी लगभग पूरे 40 सप्ताह की थी और महिला की पहले भी दो बार सिजेरियन डिलिवरी हो चुकी थी। महिला का प्लेसेंटा नीचे की ओर झुका हुआ था और उसका ब्लड प्रेशर लेवल बहुत हाई था।

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गर्भाशय की दीवार की तुलना में प्लेसेंटा की सही स्थिति का पता लगाने के लिए एक स्कैन कराया गया। जब सोनोग्राफी रिपोर्ट आयी तो उसमें प्लेसेंटा के अटके होने की बात से इनकार कर दिया गया। जिसके बाद महिला की सिजेरियन डिलीवरी के लिए 17 नवंबर का दिन तय किया गया। डॉ. चव्हाण ने अपनी टीम के साथियों, डॉ. स्नेहल शिंदे, डॉ. नेहा पनवार, डॉ. सुभानी महापात्रा, डॉ. सपना वाधवानी और वरिष्ठ नर्स सयाली गुरव के साथ सर्जरी शुरू की। सर्जरी की मदद से एक स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ जिसका बर्थ वेट 4 किलोग्राम था।

दुर्लभ है प्लेंसेंटा का गर्भाशय में धंसना

लेकिन, बच्चे के जन्म के बाद डॉक्टरों को चौंकाने वाली स्थिति का सामना करना पड़ा। दरअसल, प्लेसेंटा पूरी तरह से महिला की गर्भाशय की दीवार से चिपक गया था, और इसका एक हिस्सा बुरी तरह से अंदर की तरफ धंसा हुआ था। इस स्थिति में प्लेसेंटा को ठीक कर पाना मेडिकल टीम के लिए एक बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

डॉ. चव्हाण ने कहा, बहुत अधिक ब्लड लॉस की वजह से हमें महिला की एक कठिन प्रसूति हिस्टेरेक्टॉमी करने का बहुत जल्दी निर्णय लेना पड़ा, और उसकी पिछली सर्जरी को ध्यान में रखते हुए हमने उनके गर्भाशय को हटा दिया।

कितनी मुश्किल होती है यह स्थिति?

डॉ. चव्हाण ने बताया कि प्लेसेंटा अटकने के ऐसे मामले दुर्लभ होते हैं और हजारों डिलिवरी केसेस में से किसी एक में ऐसी स्थिति बनती है। लेकिन, अब इसके भी कई मामले सामने आने लगे हैं। डॉ. चव्हाण ने बताया कि प्लेसेंटा अटकने के मामले बढ़ने की कई वजहें हैं जैसे-

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  • गर्भाशय की प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली सर्जरी
  • फाइब्रॉइड का ट्रीटमेंट
  • कुछ प्रकार की दवाएं आदि