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Written By: Atul Modi | Published : August 27, 2021 1:48 PM IST
कोरोनावायरस से ठीक होने के बाद भारत समेत दुनिया भर में लोग तरह तरह की परेशानियों से ग्रसित हो रहे हैं। करुणा के ठीक होने के बाद के लक्षणों को समझने के लिए वैज्ञानिक भी लगातार अध्ययन कर रहे हैं। कोरोनावायरस महामारी के दीर्घकालिक प्रभाव को समझने के लिए चीन में एक अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने के 1 साल बाद भी उन्हें थकान और सांस की तकलीफ झेलनी पड़ सकती है।
द लैंसेट फ्राइडे में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि, कोविड के बाद अस्पताल से छुट्टी पाने वाले लगभग आधे मरीज अभी भी कम से कम 1 लक्षण से प्रभावित हैं उनमें 1 वर्ष बाद भी सबसे ज्यादा थकान व मांसपेशियों में कमजोरी की समस्या सामने आ रही है। ऐसी स्थिति को लॉन्ग कोविड-19 के रूप में भी जाना जाता है।
लॉन्ग कोविड-19 पर किए गए अब तक के सबसे बड़े अध्ययन में यह कहा गया है कि, डायग्नोसिस के 1 वर्ष बाद भी हर तीन में से एक रोगी में श्वसन संबंधी समस्या पाई गई है। अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक अधिक गंभीर पेशेंट में यह संख्या और भी ज्यादा देखी गई है। अध्ययन में कहा गया है कि कई रोगियों को कोरोनावायरस से पूरी तरह से ठीक होने में 1 साल से ज्यादा का समय लग सकता है।
यह अध्ययन चीन के वुहान शहर में पिछले साल जनवरी से मई के मध्य किया गया, इस अध्ययन में 1300 पेशेंट शामिल थे। शोध पत्र के मुताबिक कम से कम 1 लक्षण वाले रोगियों की हिस्सेदारी 6 महीने के बाद 68 से 49% हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि 6 महीने बाद 26% रोगियों को सांस लेने में तकलीफ थी, जो 12 महीने के बाद बढ़कर 30% हो गई।