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डिप्रेशन की दवा कोरोना वायरस के इलाज में होगी मददगार, वैज्ञानिकों का दावा

कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों का इलाज फिलहाल मलेरिया और एचआईवी की दवाइयों से किया जा रहा है। लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस की दवाई को लेकर वैज्ञानिकों ( Research for Corona Medicine) ने नई जानकारी दी है।

डिप्रेशन की दवा कोरोना वायरस के इलाज में होगी मददगार, वैज्ञानिकों का दावा
Like other coronaviruses, SARS-CoV-2 has spiky structure that helps it latch onto cells that it can invade.

Written by Kishori Mishra |Updated : May 16, 2020 12:36 PM IST

Research for Corona Medicine : पूरी दुनिया कोरोना के कहर (Covid-19 pandemic) से डरी हुई है। दुनियाभर के कई डॉक्टर्स और वैज्ञानिक कोरोना वायरस के लिए दवाई बनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई पूरी तरह से प्रभावी दवा की खोज नहीं कर सका। कोरोना वायरस से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों का इलाज फिलहाल मलेरिया और एचआईवी की दवाइयों से किया जा रहा है। लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस की दवाई को लेकर वैज्ञानिकों  (Research for Corona Medicine) ने नई जानकारी दी है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, एंटी डिप्रेशन की दवाई कोविड-19 (Covid 19 Pandemic) के लक्षणों से आराम दिला सकता है। अमेरिका के वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसीन के वैज्ञानिकों द्वारा यह ( Research for Corona Medicine) जानकारी दी गई है। यहां के वैज्ञानिक कोरोना के मरीजों पर फ्लूवोक्सामीन दवा का टेस्ट कर रहे हैं। बता दें कि फ्लूवोक्सामीन एक एंटी डिप्रेशन दवा है। इस दवाई का इस्तेमाल डिप्रेशन के मामलों में या ऑब्सेसिव कंपलसिव डिसऑर्डर के मामलों में किया जाता है।

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द सन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस दवाई के इस्तेमाल से साइकोटाइन सिंड्रोम को कंट्रोल किया जा सकता है। इस सिंड्रोम के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम ओवरड्राइव कर जाता है और शरीर में इम्यून सेल्स साइकोटाइन को काफी ज्यादा बढ़ा देता है।

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, अत्यधिक इम्यून सिस्टम शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे शरीर में ऑर्गन सिस्टम फेल होने का खतरा बढ़ता है। कोरोना वायरस के मरीजों में ये लक्षण काफी देखे जा रहे हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, फ्लूवोक्सामीन की दवाई के इस्तेमाल से इसका इलाज किया जा सकता है। इस दवाई के इस्तेमाल से साइकोटाइन्स का उत्पादन मरीज के शरीर में कम होता है और इससे सेप्सिस होने की संभावना कम हो जाती है।

वर्जिनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अल्बान गॉल्टियर ने इस बारे में बताया कि वैज्ञानिक इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस दवा पर रिसर्च करने वाली टीम में अल्बान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा है कि यदि इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना के लक्षण कम हो जाते हैं, तो यह महामारी से निपटने में कारगर साबित हो सकती है।

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