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Written By: Anshumala | Updated : October 12, 2020 11:51 AM IST
Reinfection of Covid-19 in Hindi: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि कोविड-19 के री-इंफेक्शन (Reinfection of Covid-19 cases) मामलों का गलत तरीके से वर्गीकरण किया गया है और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ऐसी घटनाओं की सच्चाई जानने के लिए अध्ययन कर रही है। अपने साप्ताहिक वेबिनार संडे संवाद में सोशल मीडिया श्रोताओं से मुखातिब हुए हर्षवर्धन ने कहा, "कोरोना के वास्तविक मामलों और गलत मामलों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी है।"
उन्होंने आगे कहा, "भले ही विभिन्न राज्यों में कोरोना री-इंफेक्शन (Corona Reinfection) के छिटपुट मामले की रिपोर्ट्स आई हैं, लेकिन आईसीएमआर डेटाबेस के सावधानीपूर्वक विश्लेषण से पता चलता है कि इनमें से कई मामलों को वास्तव में री-इन्फेक्शन के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया है। सार्स-कोव-2 (SARS-Cov-2) का डायग्नोसिस मुख्यतौर पर आरटी-पीसीआर से किया जाता है, जो मृत वायरस को भी डिटेक्ट कर लेता है। यह मृत वायरस कई बार शरीर के अंगों में हफ्तों और महीनों तक रह सकता है, जबकि वह रोगी गैर-संक्रामक (non-contagious) होता है।
"मृत वायरस का पता लगा लेने की भी आरटी-पीसीआर परीक्षण, इस विशेषता के कारण पॉजिटिव रिपोर्ट आने के कुछ समय बाद रुककर टेस्ट किए जाते हैं। इसमें कई बार रिपोर्ट पॉजिटिव के बाद निगेटिव आती है और फिर से पॉजिटिव आ जाती है, जबकि वास्तविक पुनर्निरीक्षण का मतलब है कि कोरोना से पूरी तरह से ठीक हो चुके व्यक्ति के शरीर में फिर से वायरस का आना।"
इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि आईसीएमआर पुन: संक्रमित हुए मामलों की सही संख्या समझने के लिए एक अध्ययन शुरू कर रहा है। इसके परिणाम कुछ हफ्तों में साझा किए जाएंगे। बता दें कि आईएएनएस ने पहले ही बताया था कि सार्स-कोव -2 संक्रमित व्यक्ति के ठीक होने के बाद भी उसके शरीर में तीन महीने बाद तक भी वायरस रह सकता है। हालांकि, इंफेक्शन का स्तर काफी कम हो जाता है और व्यक्ति गैर-संक्रामक हो जाता है।