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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 29, 2018 6:13 PM IST
पढ़ते-पढ़ते सो जाने से बेहतर होती है मेमोरी। © Shutterstock.
किताब, संगीत और नई चुनौतियां दिमाग की क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। अगर आप भी अपनी मेमोरी बढ़ाना चाहते हैं तो इन चीजों को अपनी जिंदगी में शामिल कीजिए। यकीन कीजिए उम्र बढ़ने के बावजूद आपकी याद्दाश्त कम नहीं होगी। नए शोध तो यही कहते हैं।
किताब रखिए सिराहने
अगर आप दिन में कुछ नया पढ़ते हैं तो आपके दिमाग़ की दो कोशिकाओं के तार जुड़ जाते हैं, जब आप सोते हैं तो यह संपर्क मज़बूत होता है और आपने जो भी पढ़ा, वो आपकी यादाश्त में शामिल हो जाता है। इसलिए नींद यादाश्त के लिए सबसे अहम फैक्टर होता है। यही वजह है कि सोने से पहले फ़िल्म देखने या डरावनी कहानी देखने से बचना चाहिए। पाजिटिव अनुभवों के साथ सोना चाहिए।
मेमोरी इन एक्शन
इस तकनीक का इस्तेमाल अभिनेता करते हैं। अगर आप कोई चीज़ मूवमेंट के साथ करें तो उसके याद होने की संभावना ज़्यादा होती है। अगर आपको कोई प्रजेंटेशन देना हो या स्पीच देनी हो तो उसकी तैयारी के लिए अपने नोट्स टहलते हुए या डांस करते हुए याद कीजिए। यह तरीका सचमुच बहुत फायदेमेंद है।
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कल्पना करें
तनाव दिमाग़ के लिए बेहतर होता है, क्योंकि आपातकाल में ही आपका दिमाग़ तेजी से सोचता है। लेकिन ज़्यादा समय तक तनाव का रहना दिमाग़ के लिए बेहतर नहीं होता है। इसलिए समय-समय पर दुनिया से एकदम कट जाना बेहतर होता है। इससे दिमाग़ को आराम मिलता है। हालांकि इस वक्त आप दिमाग़ के दूसरे हिस्से को काम पर लगा सकते हैं। ये वह हिस्सा होता है जिसमें हम दिन में सपने देखते हैं, यह यादाश्त कायम रखने के लिहाज से बेहद अहम होता है।
कुछ नया सीखें
दिमाग़ को तंदरुस्त रखने के लिए ज़रूरी है कि आप उसे चैलेंज करते रहें, नई चीज़ें सीखते रहें। मतलब कोई नई भाषा सीखना या कोई नई कला सीख कर आप अपने दिमाग़ की क्षमता बढ़ा सकते हैं। ये सब नहीं कर पाएं तो अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ ऑनलाइन गेम ही खेलकर देखिए।
संगीत सुनिए
म्यूज़िक का दिमाग पर जादुई असर होता है। किसी को गाने सुनते हुए देखिए या कोई वाद्ययंत्र बजाते हुए देखिए, आपको लगेगा कि उसका पूरा शरीर एक्टिव है। कई बार यादाश्त चले जाने के मामलों में भी म्यूज़िक से फ़ायदा देखा गया है।
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जरूरी है फैट
आप जो भी शुगर और एनर्जी का इनटेक लेते हैं उसका 20 फ़ीसदी हिस्सा सीधा दिमाग़ को जाता है, यही वजह है कि दिमाग़ की कामकाजी हालत ग्लूकोज के स्तर पर निर्भर करती है। अगर आपका शुगर लेवल नियंत्रित नहीं है तो फिर आपका दिमाग कंफ्यूज हो सकता है। ऐसा भोजन दिमाग़ के लिए बेहतर हो सकता है जिससे डोपामाइन केमिकल निकलता है। इस बात का भी ख़्याल रखें कि दिमाग़ की कोशिकाएं फैट से बनती हैं, लिहाजा खाने में फैट का इस्तेमाल नहीं छोड़े। इसके अलावा नट्स, सीड्स, नाशपाती और मछली दिमाग़ के लिए बेहतर होते हैं।