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Written By: Editorial Team | Updated : February 28, 2019 6:08 PM IST
दुनिया में लगभग 7000 ऐसे रोग हैं जिन्हें दुर्लभ माना जाता है। इनमें कुछ जानेमाने नाम हैं: सिस्टिक फाइब्रोसिस, जो श्वसन तंत्र और पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। ©Shutterstock.
हर साल फरवरी के आखिरी दिन को दुर्लभ रोग दिवस या Rare Disease Day के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद ऐसे रोगों के बारे में समाज में जागरुकता फैलाना है जिनके बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं होती। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये बीमारियां बहुत कम लोगों को होती हैं। पर इसका यह मतलब नहीं है कि इनके मरीजों और उनके परिवारों को कम तकलीफों का सामना करना पड़ता है। उलटे इन्हें सामान्य रोगों से ग्रस्त लोगों से ज्यादा परेशानी होती है जिसकी तरफ सबका ध्यान खींचने की जरूरत है।
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इन रोगों से जुड़ी एक समस्या यह भी है कि दुनिया भर में अन्य रोगों की तरह इनके लिए कोई एक नीति नहीं है। हर देश इन्हें अपने हिसाब से देखता है और तय करता है कि कोई रोग दुर्लभ कहा जाए या नहीं। इसीलिए जो रोग एक देश में दुर्लभ कहा जाता है जरूरी नहीं कि वह दूसरे देश में भी दुर्लभ माना जाए। जैसे यूरोप में मानक है कि अगर दो हजार लोगों में किसी एक व्यक्ति में कोई रोग पाया जाता है तो वह रोग दुर्लभ कहा जाएगा, वहीं अमेरिका में यह संख्या 1500 लोगों में एक है।
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पाटनी हैं इलाज की दूरियां
दुर्लभ रोग दिवस 2019 की थीम है 'ब्रिजिंग हेल्थ ऐंड सोशल केयर' मतलब स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं की दूरी मिटाना। जानकारों के मुताबिक, 80 प्रतिशत दुर्लभ रोगों की वजह आनुवांशिक होती है। बाकी के दुर्लभ रोगों के कारण बैक्टीरिया, वायरल इन्फेक्शन और ऐलर्जी होते हैं। आंकड़े बताते हैं कि करीब 50 प्रतिशत दुर्लभ रोग केवल बच्चों को ही होते हैं।
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अलग होते हैं इनके लक्षण
अलग-अलग दुर्लभ रोगों के लक्षण भी अलग होते हैं। विशेष बात यह है कि एक ही दुर्लभ रोग से ग्रस्त दो मरीजों के सभी लक्षण जरूरी नहीं कि एक जैसे हों। कुछ लक्षण तो इतने आम हैं कि रोग का पता लगने में काफी देर हो जाती है। इस वजह से इनका इलाज होने में भी दिक्कत होती है।
जानलेवा भी हो सकते हैं दुर्लभ रोग
दुर्लभ रोग रोगी के पूरे जीवन को प्रभावित करते हैं। ये रोग मरीज को अशक्त बना सकते, धीरे-धीरे उनकी क्षमता खत्म कर सकते हैं यहां तक कि ये जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। जिससे रोगियों और उनके परिवारों के रोजमर्रा के जीवन में जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। चूंकि दुर्लभ बीमारियों के लिए बहुत कम या लगभग कोई मौजूदा इलाज या उपाय नहीं हैं, इसलिए रोगियों की पीड़ा और भी बढ़ जाती है। चूंकि इन रोगों के बारे में समाज में अधिकांश लोगों को कोई जानकारी नहीं होती है इसलिए इनके रोगियों को सामाजिक भेदभाव समेत ढेरों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन रोगों के बारे में चिकित्सा विज्ञान की सीमित जानकारी और रिसर्च क अभाव भी समाज के इस रवैये के लिए जिम्मेदार है।
कुछ दुर्लभ रोगों के उदाहरण
इस समय दुनिया में लगभग 7000 ऐसे रोग हैं जिन्हें दुर्लभ माना जाता है। इनमें कुछ जानेमाने नाम हैं: सिस्टिक फाइब्रोसिस, जो श्वसन तंत्र और पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। हटिन्गटन्स डिजीज, जो ब्रेन और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी, जो मांसपेशियों को प्रभावित करते हैं।