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Ramadan 2018: डायबिटीज व हृदय रोगी रमजान में कैसे रखें रोजे ?

जानें एक्सपर्ट की सलाह कैसे डायबिटीज व हृदय रोगी भी रमजान में रोजे रख सकते हैं।

Ramadan 2018: डायबिटीज व हृदय रोगी रमजान में कैसे रखें रोजे ?

Written by akhilesh dwivedi |Published : May 19, 2018 6:29 PM IST

मई के इस गर्म महीने में रोजे रखना बेहद कठीन काम है। वैसे तो उपवास रखना सेहत के लिए ठीक होता है। अगर रोजों के दौरान एहतियात से खानपान किया जाए तो शरीर स्वस्थ रहेगा। लेकिन कुछ बीमारियों के कारण कुछ लोग इसको लेकर बहुत दुविधा में भी रहते हैं। खासकर जिन्हे डायबिटीज की बीमारी होती है उनके खान-पान में एकाएक बदलाव नुकसानदायक भी हो सकता है। रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत होते ही रोजे रखने का ख्याल ही कई बार डायबिटीज और हृदय रोगियों के मन में कई सवाल खड़े कर देता है। रोजों के दौरान लम्बे समय तक भूखा रहना पड़ता है। इस साल हमारे महाद्वीप में रोजों का समय औसत रूप से करीब 15 घंटों का रहेगा। 15 घंटों तक एक डायबिटीज रोगी के लिए बेहद कठिन चुनौती होती है। जानें एक्सपर्ट की सलाह कैसे डायबिटीज व हृदय रोगी भी रमजान में रोजे रख सकते हैं।

सैफी हॉस्पिटल से जुड़े एन्डोक्रिनोलोजिस्ट डॉ. अल्तमश शेख ने बताते हैं कि, "डायबिटीज के रोगी पूर्ण जानकारी और उपयुक्त विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर सफलतापूर्वक अपने डायबिटीज को नियंत्रित करते हुए रोजे रख सकते हैं।"

डॉ. शेख ने यह भी बताते हैं कि, "डायबिटीज मरीजों को रोजों के दौरान अपने रक्त ग्लूकोस की नियमित जांच करनी चाहिए जिससे डायबिटीज को अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सके। जो मरीज सिर्फ गोलियों के सहारे अपने डायबिटीज का नियंत्रण करते हैं, उनको विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार दवाइयों के समय में बदलाव कर लेना चाहिए।"

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डॉ. शेख कहते हैं कि, "रमजान के रोजे करते हुए डायबिटीज के मरीजों को भारी एवं गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए। भजिया, पकोड़े, मिठाइयां और तली हुई चीजों से दूर रहना चाहिए।"

एक्सिस हॉस्पिटल की डायटिशियन डॉ. हीना अंसारी ने बताती हैं कि, "रोजों के दौरान डायबिटीज के मरीजों को खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान सहूर और इफ्तार दोनों समय प्रोटीन एवं रेशे युक्त भोजन की मात्रा अधिक होनी चाहिए। तीखे मसालेदार और नमकीन व्यंजनों से दूर रहना चाहिए और साथ ही अधिक चाय एवं कॉफी के सेवन से भी बचना चाहिए।

लीलावती हॉस्पिटल के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शाहिद मर्चेट ने कहा, "जिन मरीजों का हृदय रोग स्थिर और नियंत्रित है उन्हें रोजे करने में किसी प्रकार की रोक नहीं है, लेकिन उनकी दवाइयों के समय में विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार परिवर्तन किया जा सकता है।"

डायट सलाहकार एवं लेखिका सोनल चौधरी का मानना है कि रमजान का समय आध्यात्मिक उन्नति का होता है और साथ ही सही प्रकार से रोजे रख कर सेहत को कई प्रकार से लाभान्वित भी किया जा सकता है।

स्रोत:IANS Hindi.

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चित्रस्रोत- Shutterstock Images.

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