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Written By: Anshumala | Published : August 31, 2020 1:14 PM IST
कोरोना के मरीजों के इलाज में जगी नई उम्मीद, पॉजिटिव असर दिखा रही है खून को पतला करने वाली यह दवा।
Coronavirus Treatment : कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए चिकित्सक, वैज्ञानिक से लेकर आम लोग हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों भारत में 24 घंटे में 76 हजार से भी अधिक कोरोना के नए मामले सामने आए हैं, जो अब तक का सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला आंकड़ा है। यह स्थिति बेहद ही डराने वाली है। सौ से अधिक देशों के वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन पर रिसर्च कर रहे हैं, कई वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के आखिरी स्टेज में हैं, तो कई साल के अंत तक वैक्सीन लोगों तक पहुंचाने का दावा भी कर चुके हैं। इन सबसे अलग, पुणे से एक अच्छी खबर यह भी आ रही है कि लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन (LMWH) नाम की एक दवा कोरोना के मरीजों पर पॉजिटिव असर दिखा रही है। पुणे के कुछ चिकित्सकों ने इस बात का दावा किया है।
लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन (LMWH) खून को पतला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कोरोना महामारी (Corona pandemic) में यह दवा कोविड-19 मरीजों के इलाज (Coronavirus Treatment) में प्रभावी साबित हो रही है। पुणे के चिकित्सकों ने यह दावा मरीजों पर दिखे इस दवा के सकारात्मक असर के बाद किया है। लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन (Low molecular weight heparin) ड्रग से इलाज करने के बाद कोरोना मरीज कम समय में ही हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए। कई मरीज जल्दी ठीक भी हुए हैं।
कुछ मरीजों में दवा के अच्छे रिजल्ट नजर आने के बाद चिकित्सकों ने कहा है कि सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) से संक्रमित मरीजों में ब्लड क्लॉटिंग, काउंटर ब्लड इंफ्लेमेशन की समस्या होती है। और इन दोनों समस्याओं को कम करने में लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन ड्रग प्रभावी साबित हुई है।
कई मृत कोरोना मरीजों के पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि कोरोनावायरस के कारण शरीब में छोटे-छोटे ब्लड क्लॉट्स बनते हैं। इस कारण भारत में अब चिकित्सक खून को पतला करने वाली दवाओं का इस्तेमाल इलाज (Coronavirus Treatment in hindi) के दौरान कर रहे हैं। कोरोना से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों में लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन का इस्तेमाल कई महीनों से हो रहा है, लेकिन जब से कोरोना केसेज तेजी से बढ़ रहे हैं, इस ड्रग का इस्तेमाल भी अधिक किया जाने लगा है। इसका असर भी अब तक सकारात्मक ही हुआ है।
ब्लड क्लॉट होना सेहत के लिए सही नहीं। इससे कई तरह के खतरे बढ़ जाते हैं। जब फेफड़े में ब्लड क्लॉट बनता है, तो सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन हैमरेज, किडनी की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में LMWH दवा ब्लड क्लॉटिंग होने पर मरीजों को दिया जा रहा है और यह असर भी दिखा रहा है।