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Written By: Agencies | Published : November 16, 2017 3:32 PM IST
Ayurveda can help you deal with psoriasis better © Shutterstock
असल में सोरायसिस एक तरह का ऑटोइम्युन समस्या है। सोरायसिस एक क्रोनिक त्वचा रोग है जो काफी सामान्य है। लेकिन कई लोगों को इस बीमारी के मनोवैज्ञानिक बोझ का पता नहीं है, जिसकी वजह से इसके मरीज़ इलाज के लिए परेशान हो जाते हैं और कमजोर पड़ जाते हैं। लेकिन आपको ये पता नहीं कि इस बीमारी के कारण आप एक दूसरे बीमारी को भी न चाहते हुए आंमत्रित कर बैठते हैं। हाल के एक शोध से ये पता चला है कि सोरायसिस के कारण टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा होता है।
बिना सोराइसिस (त्वचा रोग) वाले लोगों की तुलना में सोरायसिस से प्रभावित लोगों में टाइप-2 मधुमेह विकसित होने का जोखिम ज्यादा रहता है। यह जोखिम आश्चर्यजनक रूप से रोग की गंभीरता पर निर्भर है। सोरायसिस प्रतिरक्षा प्रणाली की एक बीमारी है, जिसमें त्वचा में सूजन हो जाती है, त्वचा की कोशिकाएं सामान्य से ज्यादा तेजी से बढ़ती है।
इससे लाल रंग के चकत्ते बन जाते हैं, जो सफेद त्वचा से ढक जाते हैं, जब यह त्वचा के सतह तक पहुंचते हैं, तो मर जाते हैं। सोरायसिस से पीड़ित लोग अपने शरीर का 10 फीसदी या उससे ज्यादा हिस्सा ढके रहते हैं। इनमें से बिना सोरायसिस लोगों की तुलना में 64 फीसदी सोरायसिस वाले लोगों को मधुमेह होने की संभावना रहती है। इस शोध के निष्कर्ष 'जर्नल ऑफ अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी' में प्रकाशित किए गए हैं।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि शोध के निष्कर्षो को दुनिया भर के सोरायसिस से पीड़ित लोगों को लागू करने पर 125,650 मधुमेह के नए मामले हर साल सामने आएंगे।
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