Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
विशेषज्ञों का कहना है कि अब दुनिया भर में पीआरपी (प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा) की मदद से इन्फर्टिलिटी का इलाज संभव हो पाया है हालांकि इसका कहीं पर भी इस्टैबलिस्ड प्रोसीजर के तौर पर इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
यह भी पढ़ें - प्रेगनेंसी में जरूर रखें इन पोषक तत्वों का ख्याल, हेल्दी होगा बेबी
इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल में आयोजित एक सेमिनार में आईवीफ विशेषज्ञ डॉ. सागरिका अग्रवाल ने बताया कि एक महिला की यूट्रस की लाइनिंग कमजोर और पतली थी, जिसकी वजह से वह मां नहीं बन पा रही थी। चिकित्सकों ने पीआरपी तकनीक अपना कर उनकी इन्फर्टिलिटी दूर करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा, "यह महिला शादी के 18 साल बाद इस तकनीक के जरिए मां बनी।"
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पीआरपी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मरीज के शरीर से ब्लड निकाल कर उसे विशेष तकनीक की मदद से ब्लड कंपोनेंट को अलग किया गया, जिसमें प्लेटलेट्स रिच पदार्थ काफी मात्रा में होते हैं। इसमें ग्रोथ फैक्टर और हार्मोन में सुधार की क्षमता होती है। इससे रेसिस्टेंस में सुधार होता है।
यह भी पढ़ें – क्यों डॉक्टर मना करते हैं अबॉर्शन पिल्स लेने से, जानिए इसके साइड इफैक्ट
क्या है पीआरपी तकनीक
पीआरपी को प्लैटलेट्स रिच प्लाज्मा थेरैपी के नाम से जाना जाता है। अभी तक इसका इस्तेमाल सौंदर्य के लिए किया जा रहा था। यह झड़ते बाल और त्वचा की उम्र से संबंधित परेशानियों के इलाज की तकनीक है। इसमें मरीज के शरीर से 20 से 30 मिलिलीटर खून निकाला जाता है। फिर इस खून को प्लाज्मा में बदलकर इंजेक्शन की सहायता से त्वचा में जरूरत की जगह इंजेक्ट किया जाता है। प्लाज्मा में वृद्धिकारक तत्त्व अत्यधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। इसे बालों की जड़ों में इंजेक्ट करने से जड़ों को जरूरी पोषक तत्त्व मिल जाते हैं और उनको ताकत मिलने से बाल बढऩे लगते हैं।
यह भी पढ़ें – डिलीवरी के बाद लटक गया है पेट, तो इस तरह आएं वापस शेप में
यह होती है प्रकिया
सामान्य एनेस्थीसिया से प्रभावित क्षेत्र को सुन्न कर दिया जाता है। फिर विशेष माइक्रो सुई की सहायता से पीआरपी को सिर, भौंहे या दाढ़ी के उन क्षेत्रों में इंजैक्ट किया जाता है जहां उपचार किया जाना है। पीआरपी को प्रभावित क्षेत्र पर डर्मारोलर के द्वारा भी इन्फ्यूज किया जाता है। डर्मारोलर का प्रयोग करने से पहले त्वचा पर सुन्न करने वाली सामान्य क्रीम लगा दी जाती है। इस प्रक्रिया को पूरा होने के लिए कई सिटिंग्स की जरूरत होती है।
यह भी पढ़ें – तनाव बढ़ा देता है मोटापा, जानिए किस तरह
इनफर्टिलिटी के उपचार में पीआरपी
शादी के 18 साल बाद भी पूनम मां नहीं बन पा रही थीं। मेडिकल जांच में पाया गया कि उनके यूट्रस की लाइनिंग पतली है, जिस वजह से गर्भ नहीं ठहर रहा है। लेकिन यूट्रस की लाइनिंग को मोटी बनाने के तमाम प्रसीजर और दवा अपनाने के बाद भी जब फायदा नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उन्हें सरोगेसी की सलाह दी। लेकिन पूनम अपने बच्चे की मां बनना चाहती थीं। तब डॉक्टरों ने प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (PRP) तकनीक अपनाने की सलाह दी।
यह भी पढ़ें – चित्त को शांत करता है ध्यान, हर रोज बस पंद्रह मिनट करें अभ्यास
मरीज को 2 बार दी गई PRP थेरपी
इंदिरा आईवीएफ अस्पताल से प्राप्त सूचना में बताया गया कि आमतौर पर यूट्रस की मोटाई 7 से 12 एमएम के बीच होनी चाहिए लेकिन इस मरीज के यूट्रस की मोटाई इलाज के बाद भी 6 एमएम से कम थी। डॉक्टर ने बताया कि PRP एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मरीज के शरीर से ब्लड निकाल कर उसे विशेष तकनीक की मदद से ब्लड कंपोनेंट को अलग किया गया, जिसमें प्लेटलेट्स रिच पदार्थ काफी मात्रा में होते हैं। इसमें ग्रोथ फैक्टर और हॉर्मोन में सुधार की क्षमता होती है। इससे रेसिस्टेंस में सुधार होता है। मरीज को 12वें और 14वें दिन दो बार PRP थेरेपी दी गई। उसकी एंडोमेट्रियल लाइनिंग धीरे-धीरे 6.2 से बढ़कर 6.8 हो गई। 18 वें दिन, उसकी मोटाई 7.4 एमएम तक पहुंच गई जो प्रेग्नेंट होने के लिए पर्याप्त थी।
पीआरपी थैरेपी अन्य फायदे
इस तकनीक को ठीक न होने वाले घाव (नॉन हीलिंग अल्सर) और मधुमेह के कारण होने वाले अल्सर के इलाज में भी प्रयोग किया जाता है। चेहरे के लिए की जाने वाली पीआरपी थेरैपी को वैंपायर फेसलिफ्ट कहा जाता है। बालों के प्रत्यारोपण के बाद भी इस तकनीक का उपयोग प्रत्यारोपित बालों को शक्ति देने और उन्हें विकसित करने के लिए किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक बाल झड़ने की समस्या से पीडि़त महिलाओं के लिए यह तकनीकि कारगर है।