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वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से खुद को बचाने के लिए जरूर करें ये काम

वायु प्रदूषण बेहद घातक होने के कारण कई तरह की बीमारियों और यहां तक अपंगता का कारण भी बन सकता है। यहां तक कि इससे ब्रोंकोस्पाज्म, साइनसाइटिस, सांस की बीमारियां भी हो सकती हैं।

वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से खुद को बचाने के लिए जरूर करें ये काम
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए अध्ययनों के अनुसार, हमारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली दुनिया के अति प्रदूषित शहरों में से एक है। © Shutterstock

Written by Anshumala |Published : October 30, 2018 4:02 PM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए अध्ययनों के अनुसार, हमारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली दुनिया के अति प्रदूषित शहरों में से एक है। पिछले कुछ सालों से शहर में हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है और हवा की गुणवत्ता की दृष्टि से शहर बीजिंग (चीन), अल जुबैल (सउदी अरब) और कायरो (इजिप्ट) के करीब पहुंच गया है। वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले हानिकारक धुएं के अलावा कन्सट्रक्शन साइट्स से उठने वाली धूल आज दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का मुख्य कारण बन चुकी है। खुद को किस तरह से आप प्रदूषण से होने वाले खतरों से बचाकर रख सकते हैं, बता रहे हैं जेपी हॉस्पिटल (नोएडा) के सीनियर कन्सलटेंट, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन डॉ. ज्ञानेन्द्र अग्रवाल...

घर के अंदर का वायु प्रदूषण दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा !

वायु प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं

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वायु प्रदूषण बेहद घातक होने के कारण कई तरह की बीमारियों और यहां तक अपंगता का कारण भी बन सकता है। यहां तक कि इससे ब्रोंकोस्पाज्म, साइनसाइटिस, सांस की बीमारियां भी हो सकती हैं। सांस के साथ अधिक मात्रा में कार्बन के शरीर में जाने से व्यक्ति थकान महसूस करने लगता है। दिल्ली-एनसीआर और इसके आस-पास रहने वाले अस्थमा के मरीजों पर खासतौर से इसका बुरा असर पड़ता है, जिस कारण इन्हें घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। यहां तक कि स्वस्थ लोगों में भी प्रदूषण के कारण सांस की परेशानी, सूखी खांसी, त्वचा की समस्याएं और आंखों में खुश्की आदि जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बाहर की बजाय घरों में वायु प्रदूषण 10 से 30 फीसदी अधिक : अध्ययन

प्रदूषण से खुद को यूं बचाएं

हवा साफ करने वाले पौधे लगाएं- घर की भीतरी हवा को साफ करने के लिए आप प्राकृतिक एयर-प्यूरीफाइंग पौधे लगा सकते हैं जैसे मनी प्लांट, एलोवेरा और स्पाइडर प्लांट। ये सभी पौधे अपने आस-पास की हवा को साफ करते हैं। घर में केमिकल फ्रेशनर या क्लीनर का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा बंद कमरे में मोमबत्ती या ऐसी चीज न जलाएं जिससे धुंआ पैदा होता हो।

प्रॉपर हो वेंटीलेशन- घर की खिड़कियों को खोलें ताकि हवा का सुगम संचार होता रहे। वेंटीलेशन से घर में प्रदूषण के स्तर को कम रखा जा सकता है। इससे घर में ताजी हवा आती रहती है।

एसी के फिल्टर को साफ करें- एसी के फिल्टर को नियमित रूप से साफ करें ताकि कमरे में आने वाले हवा में धूल न हो। इन फिल्टर्स को समय-समय पर बदलना भी चाहिए।

मास्क पहनें- जिन क्षेत्रों में धूल ज्यादा उड़ती हो या आंधी-तूफान का प्रभाव हो, वहां मास्क पहनें। एक अच्छे मास्क में कार्बन फिल्टर और एग्जॉस्ट वॉल्व होना अति आवश्यक है। मास्क ऐसा हो जो चेहरे पर अच्छी तरह फिट हो जाए और व्यक्ति लंबे समय तक भी इसे आराम से पहन सके। ध्यान दें कि मास्क और चेहरे के बीच में कोई गैप न हो।

[caption id="attachment_619844" align="alignnone" width="655"]indoor-plants to keep pollution away घर की भीतरी हवा को साफ करने के लिए आप प्राकृतिक एयर-प्यूरीफाइंग पौधे लगा सकते हैं। © Shutterstock[/caption]

एयर प्यूरीफायर करें यूज- एयर प्यूरीफायर कमरे की भीतरी हवा को साफ करता है और प्रदूषण के स्तर को कम करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अच्छे एयर प्यूरीफायर कमरे में हवा की गुणवत्ता को सुरक्षित स्तर पर नियंत्रित करते हैं। वायु प्रदूषण गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए हो सकता है हानिकारक

कार के भीतर खास ध्यान दें- कार की भीतरी हवा चार से पांच गुना ज्यादा प्रदूषित हो सकती है। कार में बैठने से पहले कुछ देर के लिए खिड़कियां खोल दें ताकि ताजी हवा भीतर आ जाए। अपनी कार के एसी को इन्डोर मोड में रखें।

भारी-भरकम व्यायाम न करें- जहां तक हो सके मुश्किल व्यायाम न करें। घर के बाहर कम से कम जाएं, सुबह के समय बाहर साइक्लिंग या जॉगिंग करने की बजाय भीतर रहकर वर्कआउट करें। बच्चों का खास ध्यान रखें कि वे घर से बाहर कम रहें।

आहार- विटामिन सी, मैग्नीशियम और ओमेगा फैटी एसिड से युक्त फलों का सेवन करें। ये फल शरीर की प्रतिरक्षी क्षमता को मजबूत बनाते हैं और प्रदूषण एवं बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

खूब पानी पीएं- पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर साफ हो जाता है। नियमित चाय पीने की बजाए ग्रीन टी, हर्बल टी और तुलसी से युक्त चाय का सेवन करें। इससे शरीर के टॉक्सिन्स निकल जाते हैं।

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खुद को रखें सुरक्षित- ऑटो रिक्शा की बजाय मेट्रो, बस या कार पूल का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये बंद होती हैं। इनमें प्रदूषण कम होता है। आंखों को सुरक्षित रखने के लिए चश्मा पहनें और अपने चेहरे को स्कार्फ से ढक लें। घर आने के बाद अपना गला और आंखें साफ करें।

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