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कोरोना की वजह से प्रोस्टेट ग्रंथि कैंसर के 30 फीसदी मामलों की नहीं हो पाई जांच, जानिए किस उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा
बीते 2 वर्षों से जारी कोरोनाकाल के दौरान दूसरी बीमारियां कहीं छिप सी गई हैं, जिसका अंदाजा हर साल होने वाले कुछ अध्ययनों में लगाया जाता रहा है। हाल ही में एक और रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें पुरुषों को होने वाले एक गंभीर कैंसर की जांच में 30 फीसदी की कमी की ओर इशारा किया गया है। जी हां, एसआरएल लेबोरेट्रीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कोरोना महामारी की वजह से पिछले दो वर्षों के दौरान प्रोस्टेट ग्रंथि के कैंसर की जांच में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
एसआरएल ने विश्व कैंसर दिवस के मौके पर जारी इस रिपोर्ट को जारी किया है, जिसमें इस बात को जोर देकर कहा गया है कि बीते दो वर्षों के दौरान कोरोना महामारी के कारण देश में प्रोस्टेट कैंसर की जांच में 34 प्रतिशत की कमी देखी गई है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इससे पहले साल 2021 में भी प्रोस्टेट ग्रंथि के कैंसर की जांच कोरोना महामारी से पहले के मुकाबले तक भी नहीं पहुंच सकी है। बता दें कि इन दो वर्षों के दौरान प्रोस्टेट कैंसर के मामले 2016 से भी कम पाए गए हैं।
एसआरएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद के ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि महामारी ने लोगों की स्वास्थ्य योजनाओं, नियमित जांच और मौजूदा स्थितियों की निगरानी जैसी जरूरी चीजों पर विराम लगा दिया है। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपचारात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता है कि गैर-कोविड बीमारियों पर भी पूरा ध्यान दिया जाए।
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर के बाद दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है और कैंसर से होने वाली मौतों का पांचवां प्रमुख कारण है। देश में प्रोस्टेट कैंसर के औसत वार्षिक मामले प्रति 100,000 में 5.0-9.1 के बीच है। सभी प्रोस्टेट कैंसर में से 85 प्रतिशत का पता देर से स्टेज तीन और चार में चलता है।
असामान्य प्रोस्टेट कैंसर के अधिकतम मामले 85 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 36 प्रतिशत देखे गए हैं और इसके बाद 61 से 85 वर्ष में 24 प्रतिशत मामले पाए गए हैं।
इसके अलावा, देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्से में 21 प्रतिशत असामान्य प्रोस्टेट कैंसर मामले उच्चतम रहे जबकि सबसे कम मामले दक्षिण में 15 प्रतिशत दर्ज किए गए।
(सोर्स-आईएएनएस)