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Weight loss and chronic diseases: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं और कैंसर जैसी पुरानी बीमारियों स्थितियों को बिगाड़ने और गम्भीर बनाने में मोटापा एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। ये नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां रोकने के लिए मोटापे को कम करना बहुत जरूरी है। विश्व मोटापा दिवस पर एक्सपर्ट्स ने कहा कि,इन बीमारियों के असर और खतरे से बचने के लिए लोगों को वजन कम करने में बहुत सहायता हो सकती है।
द लांसेट में छपी एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया में हर 8वां व्यक्ति मोटापे का शिकार है। दुनियाभर में 1 अरब से अधिक लोगों का वजन जरूरत से अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में 43 फीसदी वयस्क मोटापे का शिकार पाए गए । 3 दशकों में पूरी दुनिया में यह संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। जबकि, 5 से 19 साल की उम्र के लोगों में यह स्थिति 4 गुना अधिक देखी गयी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मोटापे के शिकार लोगोंकी संख्या अधिक हैरान करने वाली है। इसके साथ ही देश में गैर-संचारी रोगों के मरीज बहुत ज्यादा है।
गुरुग्राम स्थित मारेंगो एशिया अस्पताल के डॉ. गौरव बंसल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि,'' वजन अधिक होने से सेहत पर कई तरह के खराब प्रभाव पड़ सकते हैं। इससे डायबिटीज और हार्ट डिजिजेज का खतरा बढ़ जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे आपके आसपास का पर्यावरण, आपकी लाइफस्टाइल और खान-पान के तरीके''
वहीं डॉ. विवेक बिंदल ने बताया कि चाइल्डहुड ओबेसिटी या बच्चों में मोटापे का असरउनके शरीर और स्वास्थ्य पर लम्बे समय तक दिखायी दे सकता है। क्योंकि मोटापे की वजह से बच्चों को कई लाइफस्टाइल डिजिजेज का रिस्क बढ़ जाता है और उनकी मेंटल हेल्थ पर भी इसका असर पड़ सकता है।
डॉ. विवेक बिंदल ने बताया, ''टाइप 2 डायबिटीज, हृदय संबंधी समस्याएं के अलावा जॉइंट में दर्द समस्याएं मोटापे की वजह से बढ़ सकती हैं। वहीं, मोटापे की वजह से बच्चों सामाजिक दबाव महसूस हो सकता है। इससे बच्चों का आत्मसम्मान कम हो सकता है और वे डिप्रेशन या चिंता जैसी परेशानियों से घिर सकते हैं।''