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अगर आप डायबिटीज रोगी हैं तो आपके लिए अपनी किडनी की सही देखभाल करना बहुत ही जरूरी है क्योंकि ब्लड शुगर के बढ़ने से सीधे आपकी किडनी प्रभावित होती है। हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि प्रोबायोटिक डायबिटीज रोगियों के मेटाबॉलिक इंडिकेटर जैसे किडनी के काम करने की क्षमता, ग्लूकोज होमियोस्टैसिस, लिपिड मेटाबॉलिज्म, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पर सकरात्मक प्रभाव डालती हैं।
जर्नल रीनल फेल्योर में प्रकाशित इस अध्ययन में ये कहा गया कि प्रोबायोटिक्स डायबिटीज वाले किडनी रोगियों में किडनी के कामकाजको बेहतर बनाती है और ग्लूकोज व लिपिड, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने का काम करती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज वाले किडनी रोगियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव और पैसों के भार को देखते हुए ये जरूरी हो जाता है कि ऐसे तरीकों को तलाशा जाए, जो इस रोग को बढ़ने से रोक सके। इसलिए ये बहुत ही जरूरी है कि तत्काल सस्ते और प्रभावी उपचार कार्यक्रम शुरू किए जाएं ताकि मरीजों को इस गंभीर बीमारी से मौत को रोका जा सके।
शोधकर्ताओं की टीम ने कई अध्ययनों से करीब 266 लेखों और 10 से ज्यादा RCT का गहन विश्लेषण किया। इन RCT में 552 विषयों पर जानकारी थी, जिसमें से 280 रोकथाम पर और 272 कंट्रोल करने पर बंटे हुए थे।
कंट्रोल समूह से तुलना में ये मालूम हुआ कि जिन मरीजों ने प्रोबायोटिक ली थीं उनमें किडनी के काम करने से जुड़ी चोट में महत्वपूर्ण रूप से सुधार देखा गया। वहीं ग्लूकोज होमियोस्टैसिस और लिपिड मेटाबॉलिज्म भी बेहतर पाया गया। इतना ही नहीं इन लोगों में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का स्तर भी पहले के मुकाबले बेहतर पाया गया।
आगे जब जांच की गई तो ये बायोमार्कर कई कारकों द्वारा प्रभावित पाए गए जैसे प्रोबायोटिक लेने का तरीका, इसकी डोज और आप किस समय इनको ले रहे हैं।
शोध के मुताबिक, सूजन के लिए प्रोबायोटिक का इस्तेमाल करने के बारे में ये पता चला कि इस तरह की दवाएं प्रो-इंफ्लेटरी साइटोकिन्स को कम कर और नुकसान में कमी लाकर किडनी के काम करने की क्षमता को बेहतर बनाती हैं।
ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म की बात करें तो प्रोबायोटिक हमारी आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया के साथ घुल-मिल जाते हैं, जो फैटी एसिड और बाइल एसिड जैसे मेटाबोलाइट्स का उत्पादन करते हैं।
डायबिटिज वाले किडनी रोगियों में प्रोबायोटिक के चिकित्सीय प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझने के लिए भविष्य में दीर्घकालिक RCTs फॉल अप की जरूरत पर जोर दिया गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक प्रोबायोटिक, डायबिटिज वाले किडनी रोगियों के लिए इलाज का सबसे प्रभावी और सस्ता तरीका बन सकता है। इस विश्लेषण को नेशनल नैचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना और नैचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ हुनान प्रांत द्वारा समर्थन दिया गया है।