
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : July 15, 2020 10:10 AM IST
प्रोबायोटिक्स हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं और इसके महत्व पर कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर्स लगातार जोर भी देते आए हैं। इनका उपयोग पेट को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है। लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च में इसे डिप्रेशन के लिए फायदेमंद बताया गया है। रिसर्च में कहा गया है कि प्रोबायोटिक्स में मौजूद माइक्रोब्स मेंटल हेल्थ को भी बूस्ट करते हैं। जर्नल बीएमजे न्यूट्रिशन, प्रिवेंशन एंड हेल्थ में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, प्रोबायोटिक्स का प्रभाव, या तो अकेले या प्रीबायोटिक्स के साथ मिलकर बने मिश्रण से व्यक्ति के डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि यह दावा सिर्फ डिप्रेशन के लिए किया गया है, एंग्जाइटी पर अभी रिसर्च होनी बाकी है।
हमारे पेट और मस्तिष्क में गहरा संबंध होता है। वैसे तो वैज्ञानिक कहते हैं कि हमारी पूरी बॉडी ही आपस में जुड़ी हुई है। लेकिन पेट और दिमाग का संबंध इसलिए भी गहरा हो जाता है क्योंकि हम जो भी खाते हैं उसका साफ असर हमारे ब्रेन और मूड पर पड़ता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे पेट और दिमाग के बीच एक टू-वे सम्बंध होता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहते हैं। यानि कि पेट में मौजूद बैक्टिरिया दिमाग पर गहरा असर डालते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति प्रोबायोटिक्स का सेवन करें और वह डिप्रेशन का शिकार है तो उसे काफी सकारात्मक असर दिखता है।
प्रोबायोटिक अच्छे बैक्टीरिया और यीस्ट होते हैं, जो आपके पाचन में सहायक होते हैं। आमतौर पर लोग बैक्टीरिया नाम से बीमारी फैलाने वाले जिवाणु समझते हैं, लेकिन हमारे शरीर में अच्छे और बुरे दोनों तरह के जिवाणु होते हैं। आजकल प्रोबायोटिक सप्लीमेंट भी बाजार में उपलब्ध हैं।
प्रोबायोटिक्स फायदेमंद बैक्टीरिया हैं जो आंत में रहते हैं और पाचन सुधार में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक्स के विपरीत प्रीबायोटिक्स ना पचने वाले कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं जो फाइबर से भरे होते हैं और ये आंतों में बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं। आप प्रीबायोटिक्स को हजम नहीं कर सकते हैं। सभी प्रीबायोटिक्स फाइबर होते हैं और सभी तरह के फाइबर को प्रीबायोटिक्स नहीं माना जा सकता है। घुलनशील फाइबर पानी में घुल जाते हैं। इस तरह के फाइबर में ओलीगोसैचराइड्स जैसे प्रीबायोटिक्स होते हैं और इनुलिन व ओलिगोफराक्टोज जैसे यौगिक होते हैं। इन यौगिकों को एंजाइम पचा नहीं पाते हैं और न ही पेट में एसिड द्वारा तोड़ा जा सकता है। हालांकि ये यौगिक पेट में मौजूद लैक्टोबैसिलस और बिफिडोबैक्टीरिया द्वारा फर्मेन्टड होते हैं।