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Heart Stroke: क्‍या लाइफस्‍टाइल में बदलाव कर स्‍ट्रोक को रोका जा सकता है? जानिए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट

Heart Stroke Cases In India: भारत में हर साल स्ट्रोक के 14 लाख नए मामले आते हैं। वहीं, दूसरी ओर उच्च आयवर्ग वाले देशों में स्ट्रोक के मामलों की संख्या कम हो रही है।

Heart Stroke: क्‍या लाइफस्‍टाइल में बदलाव कर स्‍ट्रोक को रोका जा सकता है? जानिए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट
स्ट्रोक के खतरे को रोकने के 6 उपाय। © Shutterstock

Written by akhilesh dwivedi |Published : October 29, 2018 7:44 PM IST

जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाकर स्ट्रोक जैसी बीमारी को रोका जा सकता है और इसकी संभावना को कम किया जा सकता है। यह बात यहां विश्व स्ट्रोक दिवस पर आयोजित एक सम्मेलन में भारतीय स्ट्रोक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विनीत सूरी ने कही। अपोलो अस्पताल की तरफ से आयोजित इस सम्मेलन में जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सूरी ने मरीजों की देखभाल में परिजनों के महत्व पर रोशनी डाली। सम्मेलन में स्ट्रोक से उबर चुके लोगों के अलावा भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद रहे।

अस्पताल की तरफ से जारी बयान के अनुसार, डॉ. सूरी ने कहा, "स्ट्रोक को रोका जा सकता है और जीवन शैली में छोटे-छोट बदलाव लाकर इसकी संभावना को कम किया जा सकता है। स्ट्रोक के बढ़ने मामलों पर डॉ. सूरी ने बताया, "एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में हर दो सेकेंड में एक व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार होता है और हर छह सेकेंड में एक व्यक्ति की मृत्यु स्ट्रोक के कारण हो जाती है। हर छह में से एक व्यक्ति जीवन में कभी न कभी स्ट्रोक का शिकार होता है। हर साल दुनिया भर में 1.7 करोड़ लोगों को स्ट्रोक होता है और इनमें से 50 लाख लोग मौत का शिकार हो जाते हैं।"

High Cholesterol Levels

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स्ट्रोक की रोकथाम के लिए 6 तरीके महत्वपूर्ण हैं।

  1. ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप पर नियन्त्रण रखना।
  2. मधुमेह पर नियन्त्रण।
  3. कॉलेस्ट्रॉल पर नियन्त्रण।
  4. सेहतमंद आहार का सेवन।
  5. शराब का सेवन न करना या सीमित मात्रा में ही करना।
  6. दिल की बीमारियों, खासतौर पर एट्रियल फाइब्रिलेशन से बचा कर रखना।

भारत में क्यो बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा ?

उन्होंने कहा, "भारत जैसे निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसका मुख्य कारण यही है कि बीमारी की रोकथाम के बारे में जागरूकता की कमी है। भारत में हर साल स्ट्रोक के 14 लाख नए मामले आते हैं। वहीं, दूसरी ओर उच्च आयवर्ग वाले देशों में स्ट्रोक के मामलों की संख्या कम हो रही है। समय रहते मरीज को एमरजेन्सी में इलाज देकर बीमारी के जानलेवा प्रभाव से बचाया जा सकता है।"

कैसे रहें सतर्क 

डॉ. सूरी ने कहा, "जानकारी नहीं होने के कारण लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे स्ट्रोक का शिकार हो चुके हैं। मरीज को गोल्डन आवर (4.5 घंटे) के अंदर अस्पताल पहुंचाना बहुत जरूरी होता है। समय पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को समय पर थ्रोम्बोलाइटिक या 'क्लॉट बस्टर' दवाएं दे दी जाती हैं, जिससे ब्लॉक हो चुकी वैसल्स खुल जाती हैं और मरीज समय रहते ठीक हो सकता है।"

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डॉ. सूरी ने कहा, "बिना कारण अचानक चेहरे, बाजू, टांग (शरीर के एक साइड में) में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना, बोलने और समझने में परेशानी, चक्कर आना, अचानक तेज सिर दर्द। लोगों को इन लक्षणों के बारे में जागरूक होना चाहिए और अगर किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उसे अस्पताल ले जाना चाहिए।"

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