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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार यानी 4 अप्रैल को आईआईटी बॉम्बे में कैंसर के उपचार लिए भारत की पहली घरेलू सीएआर टी-सेल थेरेपी लॉन्च की। यह जीन आधारित थेरेपी ब्लड कैंसर के साथ-साथ और भी कई कैंसर के इलाज में मदद करेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर के विरुद्ध लड़ाई में यह देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने यह विश्वास जताया कि यह थेरेपी लाखों कैंसर रोगियों को नया जीवन प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस थेरेपी का विकास 'मेक इन इंडिया' पहल का एक उदाहरण है और यह भारतीय वैज्ञानिकों व चिकित्सकों की क्षमता के बारे में बताती है।
आपको बता दें कि यह थेरेपी आइआइटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल सेंटर के सहयोग से विकसित की गई है। राष्ट्रपति ने थेरेपी के लांच कार्यक्रम में कहा, "यह इलाज कुछ समय से विकसित देशों में उपलब्ध है, लेकिन यह बेहद महंगा है और दुनिया भर के अधिकांश रोगियों की पहुंच से बाहर है। जैसा कि मैं इसे समझती हूं, आज लॉन्च की जा रही थेरेपी के बारे में नई बात यह है कि इसकी लागत अन्य जगहों पर उपलब्ध की तुलना में 90 प्रतिशत तक कम है, जो इसे दुनिया की सबसे किफायती CAR-T सेल थेरेपी बनाता है।"
टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक सुदीप गुप्ता ने कहा कि सीएआर टी-सेल थेरेपी एक बेहद महंगा उपचार है, जो अधिकतर लोगों की पहुंच से बाहर है। लेकिन देश में विकसित कम लागत वाली यह थेरेपी बड़ी उपलब्धि है। आइआइटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर सुभासिस चौधरी ने कहा कि विदेश में इस इलाज की कीमत लगभग चार करोड़ रुपए है, जबकि भारत में यह केवल 30 लाख रुपए होगा।
सीएआर-टी सेल थेरेपी एक प्रकार का कैंसर इम्यूनोथेरेपी उपचार है। इसमें रोगी की टी सेल्स (एक प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं) का उपयोग किया जाता है, जिन्हें प्रयोगशाला में आनुवंशिक रूप से बदल दिया जाता है। ये टी-सेल्स कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं और उन्हें नष्ट करने का काम करती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह थेरेपी कैंसर के रोगियों के लिए वरदान साबित हो सकती है।