मुंबई में कोविड-19 संक्रमित महिला का हुआ गर्भपात, प्लेसेंटा से पहुंचा भ्रूण तक वायरस

मुंबई में सामने आए मामले में कोविड-19 संक्रमित महिला का प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात हो गया। इस महिला की टेस्ट रिपोर्ट्स के आधार पर कहा गया कि महिला की गर्भनाल और प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण तक पहुंचा था।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 24, 2020 4:55 PM IST

Pregnancy and Covid: कोरोना वायरस महामारी के असर से गर्भ में पल रहे बच्चे कितना सुरक्षित हैं इससे जुड़ी एक चौंकानेवाली घटना सामने आयी है। मुंबई में एक कोविड-19 संक्रमित महिला का  गर्भपात हो गया । मिली जानकारी के अऩुसार  मुंबई में सामने आए मामले में कोविड-19 संक्रमित महिला का प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात हो गया। इस महिला की टेस्ट रिपोर्ट्स के आधार पर कहा गया कि महिला की गर्भनाल और प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण तक पहुंचा था। (Pregnancy during Covid)

कोविड-19 संक्रमण में समय के साथ अलग-अलग तरह के बदलाव आ रहे हैं। पहले कहा जा रहा था कि, गर्भ में पल रहे बच्चे को कोरोना वायरस का खतरा नहीं है। लेकिन, पिछले कुछ समय से इससे जुड़ी नयी स्थितियां भी सामने आ रही हैं।  एक्सपर्ट्स के अनुसार सार्स-कोवि 2 (SARS-CoV-2) इंफेक्शन प्रेगनेंट महिलाओं के लिए नुकसानदायक होता है। जिसका एक उदाहरण है यह मामला।

कोविड-19 संक्रमित महिला का हुआ गर्भपात:

मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित कर्मचारी राज्य बीमा योजना अस्पताल और  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च की एक जॉइंट रिसर्च के नतीजे सप्ताह सार्वजनिक किए गए। इस रिसर्च के दौरान पाया गया कि, यह अपनी तरह का पहला मामला है।  जिसमें कोविड-19 इंफेक्शन 14 दिनों तक टिश्यू में जीवित रहा। जबकि, डॉक्टरों ने उसे गले से साफ कर दिया था। इस संक्रमण के ख़तरे का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि, यह वायरस शरीर के अंदर पहुंचने के बाद जीवित भी रहा और इसने वायरस की संख्या भी शरीर में बढ़ा दी। नतीजतन वायरस भ्रूण के सम्पर्क में पहुंच गया।

प्लेसेंटा से पहुंचा भ्रूण तक वायरस:

वैज्ञानिक रिसर्च और स्टडीज की जानकारी उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट मेडआरएक्सआईवी ( MedRxiv) पर यह रिसर्च पेपर प्रकाशित किया गया। जिसमें कहा गया कि, यह महिला अस्पताल में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करती है। जब इस महिला की प्रेगनेंसी के 2 महीने हुए, तब नोवल कोरोना वायरस इंफेक्शन का टेस्ट कराया गया। टेस्ट में महिला को पॉजिटिव पाया गया। इसी तरह 13 सप्ताह बाद महिला का दोबारा कोरोना टेस्ट कराया गया। जिसमें, कोविड-19 इंफेक्शन से वह ठीक हो चुकी थी। रेग्यूलर अल्ट्रासाउंट जांच में पाया गया कि भ्रूण की मृत्यु हो चुकी है।

इसके बाद अस्पताल ने इसे कोविड-19 से जुड़े होने के अनुमान के आधार पर NIRRH से इस बाबत सम्पर्क किया।  जिसके बाद जांच के दौरान कई जानकारियां सामने आयी। महिला की दोबारा कोविड-19 इंफेक्शन की जांच की गयी। फिर, पीड़ित महिला के प्लेसेंटा, एमनियोटिक फ्लूइड के साथ-साथ भ्रूण की लाइनिंग की भी जांच की जाए। रिसर्च के दौरान पाया गया कि इंफेक्शन के 5 हफ्तों के बाद भी प्लेसेंटा में वायरस की तादाद बढ़ती जा रही है।

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