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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 30, 2022 3:10 PM IST
कोविड से ठीक होने के बाद क्या आम बन गई हैं ऑटो-इम्यून डिजीज? स्टडी में दावा इन लोगों को हो रही ज्यादा परेशानी
दुनियाभर में कोविड को फैले हुए दो साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अभी भी लोगों पर इसका प्रभाव कितना गंभीर हो सकता है इस बात की जानकारी अभी तक स्पष्ट नहीं है। कोविड से ठीक होने के बाद ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में जिनकी जानकारी लोगों को काफी कम है उसमें शामिल है ऑटो-इम्यून डिजीज, जिसमें गठिया से लेकर रक्त वहिकाओं में सूजन शामिल है। कोविड के बाद इन बीमारियों के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है, जो कि इम्यून सिस्टम में खराबी के कारण होती है।
यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिसर्च में पाया गया है कि कोविड के मरीजों में ऑटोइम्यून से संबंधित रोगों के क्लीनिकल लक्षण ढेर सारे प्रकार के हो सकते हैं और ये शरीर में सिस्टेमिक डिसऑर्डर का कारण बन सकता है, जो कई अंगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। सबसे आम रूमेटिक ऑटोइम्यून डिजीज, जो इंफेक्शन के दौरान या फिर बाद में पाई जाती है वो और कोई नहीं बल्कि वस्कुलाइटिस है, जो आपकी रक्त वहिकाओं को प्रभावित करती है। इसके अलावा अर्थराइटिस भी है, जो आपके जोड़ो को प्रभावित करते हैं।
एक ऑटो-इम्यून रोग एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हमारे शरीर की टी और बी कोशिकाएं बाहरी और अंदरूनी प्रोटीन के बीच अंतर को पहचानने में विफल रहती हैं। ये कोशिकाएं बाहरी रोगुणाओं को नष्ट करने का काम करती हैं। जब ये कोशिकाएं बाहरी रोगाणुओं को नहीं पहचान पाती हैं तो ये अंदरूनी कोशिकाओं को ही नष्टकरना शुरू कर देती हैं।
व्यस्कों में ढेर सारे ऑटोइम्यून रोग पाए जाते हैं लेकिन कोविड से ठीक होने के बाद, जो सबसे ज्यादा आम है उसका नाम गिल्लेन बर्रे सिंड्रोम, अर्थराइटिस, वस्कुलाइटिस, रूमेटाइड अर्थराइटिस और ल्यूप्स शामिल है, जिसमें आपकी किडनी भी प्रभावित होती है। बच्चों में ऑटो-इम्यून डिजीज की वजह से MIS-C हो सकता है, जिसे मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कहते हैं।
ऑटोइम्यून डिजीज के लक्षणों की बात करें तोः
1-थकान
2-जोड़ों में दर्द
3-सूजन
4-हल्का बुखार
5-कमजोरी
6-नसों में झनझनाहट शामिल है।
एक्सपर्ट्स का कहना है अगर किसी मरीज को जोड़ों में दर्द और सूजन, शरीर में दर्द, थकान, कमजोरी, स्किन पर लाल रंग दिखाई दे, जिसका कोई आम कारण नहीं हो तो आपको डॉक्टर को तुरंत दिखाने की जरूरत है। बिना वजह के थकान, सूखी खांसी और सिरदर्द भी इसके आम लक्षण है।
इस बीमारी के सटीक निदान का पता लगाने के लिए कई सारे टेस्ट किए जाते हैं और उसके हिसाब से ही उपचार शुरू किया जाता है। संपूर्ण जांच के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। आमतौर पर ऑटोइम्यून रोगों के उपचार के लिए रूमेटोलॉजिस्ट और इम्यूनोलॉजिस्ट की मदद से ली जा सकती है।