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दिल्ली के बाद लखनऊ में भी बिगड़ी आबोहवा, AIQ पहुंचा 250 के पार, अस्थमा मरीजों को संभलकर रहने की सलाह

डॉक्टरों का कहना है कि खराब एयर क्वालिटी से सांस से जुड़ी समस्याओं (respiratory) से परेशान लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह उनके स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है जिससे कॉम्प्लिकेशन्स बढ़ सकती हैं।

दिल्ली के बाद लखनऊ में भी बिगड़ी आबोहवा, AIQ पहुंचा 250 के पार, अस्थमा मरीजों को संभलकर रहने की सलाह

Written by Sadhna Tiwari |Published : November 8, 2023 9:37 PM IST

Air Pollution In Lucknow: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी वायु प्रदूषण से बच न सकी है। लखनऊ में लगातार हवा की क्वालिटी में हो रही गिरावट पर हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चिंता जाहिर की है। डॉक्टरों का कहना है कि खराब एयर क्वालिटी से सांस से जुड़ी समस्याओं (respiratory) से परेशान लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह उनके स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है जिससे कॉम्प्लिकेशन्स बढ़ सकती हैं।

समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य भर के अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं वहां अगले कुछ दिनों तक आने वाले मरीजों में श्वसन मार्ग से जुड़ी बीमारियों और अन्य मौसमी बीमारियों के इलाज के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जाएं। प्रमुख सचिव (चिकित्सा स्वास्थ्य) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अधिकारियों को कहा है कि वे सांस की बीमारी और इंफ्लेमेशन के मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड आरक्षित करें।

वायु प्रदूषण ने बढ़ायी अस्थमा मरीजों की मुश्किलें

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में श्वसन चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ संकाय राजीव गर्ग ने बताया कि,“ओपीडी में हमें पहले इक्का-दुक्का फॉलो-अप के मरीज मिलते थे जो डॉक्टर द्वारा दी गयी तारीख से पहले हमें रिपोर्ट करते थे। लेकिन, बीते कुछ दिनों से दर्जनों ऐसे मरीज सामने आए हैं जिनमें वायु प्रदूषण की वजह से लक्षण दिखायी दे रहे हैं।”

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उन्होंने बताया कि, “प्रदूषण के संपर्क में आने से इन मरीजों में सांस की बीमारी के लक्षण गम्भीर हो रहे हैं। इसी वजह से अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या में दिन-ब-दिन इजाफा देखा जा रहा है।”

बता दें कि, 2 दिन पहले लखनऊ में मुख्य प्रदूषण के तौर पर पीएम 2.5 के साथ एयर क्वालिटी इंडेक्स 251 दर्ज किया गया था। एक्सपर्ट्स् के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक पैमाने या एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार,

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  • 0 और 50 के बीच एआईक्यू (AIQ) ‘अच्छा’
  • तो वहीं, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’
  • 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’
  • 201 और 300 के बीच ‘खराब’
  • 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ माना जाता है
  • जब एआईक्यू 450 से अधिक हो तो 401 और 450 के बीच की ‘गंभीर’ माना जाता है

क्या कहना है डॉक्टरों का

डॉक्टरों का कहना है कि वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद सांस की बीमारी वाले मरीजों की संख्या में 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गयी है। डॉ. देवाशीष शुक्ला ( कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक) का कहना है कि, “अगर कैंसर रोगी के किसी मरीज को अस्थमा भी है, तो खराब हवा के कारण उनके लिए अधिक रिस्क हो सकता है। ऐसे मरीजों को अधिक सावधन रहने की जरूरत पड़ सकती है।”