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Written By: Kishori Mishra | Published : June 19, 2020 1:31 PM IST
The pandemic would get “worse and worse and worse” if the basics weren’t followed, warns the World Health Organization.
Polio Vaccine and Coronavirus : कोरोनावायरस का अबतक कोई सटीक इलाज नहीं मिल पाया है। अब इस बीमारी से लोगों को बचाने के लिए पोलियो वायरस को खत्म करने वाली वैक्सीन (Polio Vaccine and Coronavirus) का उपयोग करने की तैयारी चल रही है। विश्व स्तर के शोधकर्ताओं ने पोलियो की ऑरल वैक्सीन के इस्तेमाल करने की सलाह दी है। भारतीय वैज्ञानिकों ने इस सलाह पर अपना एक सतर्क रुख लिया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने इस बात को स्वीकार किया है कि पोलियो की वैक्सीन का कोरोनावायरस (कोविड-19) के इलाज में इस्तेमाल के लिए परीक्षण (Polio Vaccine and Coronavirus) करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संभावना जताई है कि यह वैक्सीन कोरोनावायरस के इलाज में सुरक्षित साबित हो सकती है।
बता दें कि वैज्ञानिको के मुताबिक, कोविड-19 के लिए वैक्सीन तैयार होने में कम से कम एक साल का समय लगेगा। इस बीच वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोनावायरस से तत्काल राहत पाने के लिए पहले से ही कई प्रभावी और सुरक्षित वैक्सीन मौजूद हैं। इन वैक्सीन में टीबीरोधी बैक्यिूलस कैलमैट्टेगुरिन (बीसीजी) और ऑरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) भी शामिल हैं। यह दोनों वैक्सीन भारतीय बच्चों के लिए पहले से ही प्रतिरक्षक अभियान का हिस्सा बन चुकी हैं।
इस बारे में जम्मू के सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिव मेडिसिन (सीएसआईआर-आईआईआईएम) के निदेशक राम विश्वकर्मा ने कहा ओपीवी वैक्सीन चिकित्सकीय परीक्षण संचालित करने लायक वैक्सीन है है। राम विश्वकर्मा ने पिछले सप्ताह एक साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए अंतरराष्ट्रीय शोध दल के आधार को लेकर कहा, "अगर ओपीवी लोगों को सार्स-कोव-2 वायरस से सुरक्षित रख सकती है तो इसका परीक्षण होना चाहिए।"
मालूम हो कि कोरोनावायरस की वैक्सीन की अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम में अमेरिका के दो मशहूर वैज्ञानिक श्यामसुंदरम कोट्टली और रॉबर्ट गैलो शामिल हैं। यह टीम ही पोलियो वैक्सीन के उपयोग की बात कर रही है। गैलो एचआईवी वायरस की खोज में सहयोगी रहे हैं। राम विश्वकर्मा ने कहा, "पोलियामायलिटिस वायरस को रोकने के लिए उपयोग की जाने वाली वैक्सीन का प्रयोग 1950 से हो रहा है और कई अन्य वायरल संक्रमण में भी इसे प्रतिरक्षक पाया जा चुका है।" उन्होंने साथ ही कहा, "सामान्य तौर पर जन्मजात प्रतिरक्षा को वैक्सीन लगवाकर बढ़ाया जा सकता है और ओपीवी इस हिसाब से कोरोना संक्रमण के खिलाफ अस्थायी सुरक्षा दे सकती है।"
विश्वकर्मा के मुताबिक, गैलो की ओर से प्रस्तावित विचार काफी मजबूत परिकल्पना पर आधारित है। लेकिन हम कह नहीं सकते हैं कि अंत में इसका क्या होने वाला है। क्योंकि कोरोना संक्रमण के कई चरण धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। शुरुआती लक्षणों में पोलियो वैक्सीन से मरीजों के इलाज में मदद मिल सकती है, लेकिन शायद यह गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों के लिए प्रभावी ना हो।
दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्युनोलॉजी (एनआईआई) के वैज्ञानिक इम्युनोलॉजिस्ट सत्यजीत रथ ने इस बारे में कहा, "हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि गैलो और उनकी टीम ओपीवी के एक वैक्सीन के तौर पर काम करने की बात नहीं कर रहे हैं, जिससे खास प्रतिरक्षक प्रतिक्रिया मिलती है। इसके बजाय वे लोगों को एक वायरल संक्रमण देने की बात कर रहे हैं, कोई भी वायरल संक्रमण, जो शरीर की जन्मजात एंटीवायरल और दाहक प्रतिरक्षा को सक्रिय कर देगी। इससे किसी अन्य वायरस (सार्स-कोव-2 या कोई अन्य) के उस दौरान शरीर में प्रवेश करने के मौके कम हो जाएंगे।"